'सतलुज' पर प्रतिबंध के बाद भाजपा विपक्ष के निशाने पर, राजनीतिक बयानबाजी तेज

'सतलुज' पर प्रतिबंध के बाद भाजपा विपक्ष के निशाने पर, राजनीतिक बयानबाजी तेज

पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस फैसले को लेकर भाजपा विपक्ष के निशाने पर आ गई है। जहां एक ओर भाजपा चुनावों से पहले जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म को हटाए जाने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसे व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। इसके चलते नई पीढ़ी में भी फिल्म और उससे जुड़े विषय को लेकर रुचि बढ़ी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि अन्य राजनीतिक दलों ने भाजपा की आलोचना की है। आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने इस कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए कहा कि यह पंजाब के प्रति भाजपा के रवैये को दर्शाती है। उनका कहना था कि जब कोई देश अपने इतिहास से डरने लगता है तो सेंसरशिप उसका सबसे खतरनाक हथियार बन जाती है। उन्होंने फिल्म को बिना किसी देरी के दोबारा उपलब्ध कराने की मांग की। कंग ने कहा कि यह फिल्म 1980 और 1990 के दशक के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों तथा जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों को बिना किसी रोक-टोक के प्रचारित किया जाता है, वहीं पंजाब से जुड़े संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों को हटाया जा रहा है। आप के प्रवक्ता नील गर्ग ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सत्य से क्यों डर रही है और क्या कांग्रेस तथा भाजपा के बीच इस मामले में कोई अंदरूनी समझ है। पंजाब के पूर्व एडवोकेट जनरल आर. एस. चीमा ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था और अदालत ने माना था कि उनकी हत्या पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई थी। ऐसे में उनके जीवन पर आधारित फिल्म के प्रदर्शन में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं, भाजपा नेता और पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा कि इस प्रकार की फिल्में पुराने घावों को फिर से हरा करती हैं और इन्हें प्रदर्शित करने से बचना बेहतर होता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु ने भी कहा कि फिल्म को वापस लेना सभी के हित में है, क्योंकि ऐसी फिल्में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। दिलजीत दोसांझ बोले- फिल्म को अब कोई खत्म नहीं कर सकता फिल्म के मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने ZEE5 से फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अब कोई चिंता नहीं, सभी ने इसे डाउनलोड कर लिया है। एक बार कोई फिल्म आ जाए तो उसे खत्म नहीं किया जा सकता।" उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही उम्मीद थी कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है। उन्होंने राजस्थान के एक गुरुद्वारे में फिल्म दिखाए जाने का भी उल्लेख किया। दिलजीत ने कहा कि फिल्म को रिलीज करने का यही एक तरीका था और जितनी अधिक इसे रोकने की कोशिश की जाएगी, उतनी ही अधिक इसकी लोकप्रियता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट से किसी भी सामग्री को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का दिया हवाला नई दिल्ली में सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने आईटी नियम, 2021 के तहत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए ZEE5 को फिल्म 'सतलुज' हटाने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि फिल्म के कुछ हिस्सों का भारत विरोधी तत्वों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की आशंका थी। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह भी आशंका जताई गई कि फिल्म की कुछ सामग्री का उपयोग पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को बढ़ावा देने या समर्थन जुटाने के लिए किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि फिल्म निर्माताओं ने वर्ष 2022 में इसके मूल शीर्षक 'पंजाब 95' के नाम से सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 संशोधनों को स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद सिनेमाघरों में इसकी रिलीज नहीं हो सकी। बाद में निर्माताओं ने संशोधनों को लागू किए बिना फिल्म को नए शीर्षक 'सतलुज' के साथ चुपचाप ZEE5 पर जारी कर दिया, क्योंकि ओटीटी सामग्री सेंसर बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। केवल सिंह ढिल्लों केंद्र से करेंगे चर्चा पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि वह जल्द ही पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से इस विषय पर चर्चा करेंगे और फिल्म हटाए जाने के कारणों की जानकारी लेने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि वह संबंधित केंद्रीय मंत्री के समक्ष भी यह मामला उठाएंगे। सुखबीर सिंह बादल ने प्रतिबंध की आलोचना की शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने को सत्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार रखता है। उनके अनुसार, यह फिल्म पंजाब के दर्दनाक इतिहास और जसवंत सिंह खालड़ा के बलिदान को सामने लाती है और इसे इस तरह दबाया नहीं जाना चाहिए।