संजीव अरोड़ा मामले में हाई कोर्ट ने ईडी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 10 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

संजीव अरोड़ा मामले में हाई कोर्ट ने ईडी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 10 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मनी लॉन्ड्रिंग और कथित जीएसटी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने जांच एजेंसी से मामले की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। इसी मामले की नियमित सुनवाई गुरुग्राम की विशेष अदालत में भी जारी है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है। उल्लेखनीय है कि ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद संजीव अरोड़ा फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। उनकी ओर से अदालत से राहत पाने के लिए लगातार कानूनी प्रयास किए जा रहे हैं। क्या है ईडी का मामला? ईडी के अनुसार, मेसर्स एचएसआरएल (HSRL) ने 12 मई 2023 से 27 अक्टूबर 2023 के बीच देश और विदेश की कई कंपनियों को लगभग 157.12 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन की बिक्री दर्शाई थी। इनमें से करीब 102.50 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित दो कंपनियों, मेसर्स फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और मेसर्स ड्रैगन ग्लोबल FZCO, को निर्यात किए जाने का दावा किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि मेसर्स फोर्टबेल टेलीकॉम का संबंध लुधियाना के कारोबारी हेमंत सूद और चंद्रशेखर की कंपनी मेसर्स फोर्टबेल गैजेट प्राइवेट लिमिटेड से है, जो मेसर्स फाइंडॉक फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से एचएसआरएल से जुड़ी हुई है। ईडी ने 9 मई की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया था कि एचएसआरएल ने 27.73 करोड़ रुपये की राशि ऐसी फर्म को स्थानांतरित की, जो एक दिहाड़ी मजदूर के नाम पर पंजीकृत थी। 17 अप्रैल को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत की गई छापेमारी के बाद 18 अप्रैल को गुरुग्राम के उद्योग विहार थाने में संजीव अरोड़ा, उनके पुत्र काव्या, हेमंत सूद, चंद्रशेखर और संबंधित कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद ईडी ने 5 मई को अपनी ईसीआईआर (ECIR) दर्ज की। इस बीच संजीव अरोड़ा ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी और संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों के विपरीत बताया है। उन्होंने गुरुग्राम अदालत द्वारा जारी रिमांड आदेशों को भी निरस्त करने की मांग की है।