सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा, याचिकाकर्ता ने जजों पर फेंके कागज
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- (Asia/Kolkata)
भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में शुक्रवार को उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों के साथ अभद्र व्यवहार किया और बेंच की ओर कागजों का एक बंडल फेंक दिया। इस घटना के कारण कुछ समय के लिए अदालत की कार्यवाही बाधित रही। यह मामला जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता, जिसकी पहचान प्रबल प्रताप के रूप में हुई है, ने सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों को "मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट" कहकर संबोधित किया। उसने अदालत को "आदेश" देते हुए कहा कि लखनऊ में तैनात एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और एक निजी कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। जब जस्टिस विश्वनाथन ने उससे पूछा कि क्या वह बेंच को आदेश दे रहा है, तो याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि वह "सॉवरेन" (Sovereign) है। इसके बाद उसने अचानक अपनी फाइल से कागज निकालकर बेंच की ओर फेंक दिए, जो अदालत कक्ष में बिखर गए। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया, उसे हिरासत में लिया और अदालत कक्ष से बाहर ले गए। घटना से पहले याचिकाकर्ता ने लखनऊ के एक एसीपी और एक निजी कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। जब अदालत ने उसके रवैये पर सवाल उठाया, तो उसने कहा कि जो कुछ कहना था, वह रिकॉर्ड पर है। इसके बाद उसने अपने मामले से जुड़े दस्तावेज हवा में उछाल दिए और अदालत कक्ष में अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। हालांकि, इस अनुचित व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की मानसिक स्थिति "बहुत परेशान" (Very Disturbed) प्रतीत होती है और वह निराशा के कारण ऐसा व्यवहार कर रहा था। अदालत ने उसके प्रति सहानुभूति व्यक्त की, लेकिन रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद उसकी याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में भी एक वकील ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की पीठ की ओर कोई वस्तु फेंकी थी। हालांकि, मौजूदा मामले में अदालत ने संयम बरतते हुए आगे कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई उपयोगकर्ताओं ने याचिकाकर्ता के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए उसके खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
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