बेअदबी मामलों में डेरों को भी कानून के दायरे में लाने की मांग, सरकार को मिला एक महीने का समय
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने ‘सत्कार संशोधन अधिनियम’ में मौजूद आपत्तियों को दूर करने के लिए पंजाब सरकार को एक महीने का समय दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार निर्धारित अवधि के भीतर अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर विवादित बिंदुओं का समाधान करेगी। मीडिया से बातचीत के दौरान ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने बताया कि आज यहां उपस्थित लगभग 84 विधायकों, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे, ने हाथ उठाकर इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई विधायकों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने इस अधिनियम को पारित किए जाने से पहले न तो पढ़ा था और न ही इसकी पूरी जानकारी ली थी। उन्होंने कहा कि सभी उपस्थित विधायकों ने जयकारों के बीच हाथ उठाकर इस निर्णय का समर्थन किया। इसी आधार पर उन्हें उम्मीद है कि सरकार एक महीने की समय-सीमा पूरी होने से पहले ही अधिनियम में दर्ज आपत्तियों का समाधान कर देगी। कार्यकारी जत्थेदार ने बताया कि अधिनियम की आपत्तिजनक धाराओं के संबंध में पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां के माध्यम से सरकार को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि आज एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है कि बेअदबी से जुड़े मामलों में सिख विरोधी डेरों को भी कानून के दायरे में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी ऐसे डेरे से जुड़ा व्यक्ति बेअदबी की घटना में शामिल पाया जाता है, तो केवल संबंधित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उस डेरे के प्रमुख और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों को भी इस कानून के तहत जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इस बीच, विपक्षी नेताओं ने भी मांग की कि भगवंत मान सरकार ‘सत्कार संशोधन अधिनियम’ में तत्काल संशोधन करे और इस विषय पर श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) तथा समूचे पंथ को विश्वास में लेकर आगे की कार्रवाई करे।
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