चाय की रेहड़ी से 100 करोड़ के ड्रग नेटवर्क तक: कौन है अक्षय छाबड़ा?
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- (Asia/Kolkata)
लुधियाना की अनाज मंडी में चाय की रेहड़ी लगाने से शुरुआत करने वाला और बाद में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के नशा कारोबार से जुड़कर बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाला अक्षय कुमार छाबड़ा अब असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही बंद रहेगा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने स्पष्ट किया है कि उसके खिलाफ विभिन्न अदालतों में चल रहे मामलों का निपटारा होने तक उसे डिब्रूगढ़ जेल से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। लुधियाना के नितेश विहार निवासी अक्षय छाबड़ा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेरोइन तस्करी का बड़ा नेटवर्क संचालित करने के आरोप हैं। इस नेटवर्क का खुलासा करीब दो वर्ष पहले NCB की चंडीगढ़ इकाई ने किया था। एजेंसी का कहना है कि छाबड़ा को उसके आपराधिक नेटवर्क से पूरी तरह अलग रखना आवश्यक है। यह मामला नए ‘ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब संशोधन) एक्ट, 2025’ के लागू होने के बाद विशेष चर्चा में आया है। इस संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 21 अप्रैल 2026 को सरकारी गजट में अधिसूचित किया गया था। कानून के तहत राज्य की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या जनहित को ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों की सहमति और संबंधित अदालत की अनुमति से विचाराधीन कैदियों अथवा नजरबंद व्यक्तियों का स्थानांतरण किया जा सकता है। जेल में रहते हुए भी नेटवर्क संचालित करने के आरोप सूत्रों के अनुसार, पंजाब की जेलों में बंद रहने के दौरान भी छाबड़ा कथित तौर पर अपने ड्रग नेटवर्क का संचालन करता रहा। उसकी पिछली कैद के दौरान उसके खिलाफ तीन अतिरिक्त एफआईआर दर्ज की गई थीं। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उस पर लुधियाना सेंट्रल जेल से नशा तस्करी रैकेट संचालित करने का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया था, जिसके जरिए वह कथित तौर पर अपने सहयोगियों को निर्देश देता था। NCB के मेमोरेंडम में कहा गया है कि डिब्रूगढ़ जेल में उसकी निरंतर नजरबंदी जरूरी है, ताकि वह अपने कथित आपराधिक नेटवर्क से पूरी तरह कट जाए और उसे किसी भी प्रकार की ऐसी पहुंच या प्रभाव न मिले, जिससे उसकी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और अफगान कनेक्शन जांच एजेंसियों के अनुसार, छाबड़ा ने महज तीन वर्षों में चाय की रेहड़ी से आगे बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की। उस पर आरोप है कि वह अफगानिस्तान से हेरोइन मंगवाता था और इसे ईरान से आयात किए गए 612 टमाटर चटनी के डिब्बों तथा 350 जूस की बोतलों में छिपाकर भारत लाया जाता था। अक्षय छाबड़ा को पहली बार नवंबर 2022 में जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह कथित तौर पर शारजाह (यूएई) भागने की कोशिश कर रहा था। कानूनी कार्रवाई और डिब्रूगढ़ जेल में नजरबंदी ‘प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट’ (PITNDPS) के तहत गठित तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड पहले ही अक्षय छाबड़ा और उसके दो सहयोगियों—जसपाल सिंह उर्फ गोल्डी तथा बलविंदर सिंह उर्फ बिल्ला हवेलिया—को डिब्रूगढ़ जेल में एक वर्ष की नजरबंदी के आदेश दे चुका है। यह कार्रवाई पंजाब, गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह, जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान तक फैले कथित 20,400 किलोग्राम हेरोइन तस्करी नेटवर्क से जुड़े मामलों के संदर्भ में की गई थी। गोल्डी, जो पेशे से बढ़ई बताया जाता है और जिस पर नशीले पदार्थ छिपाने के लिए विशेष गुप्त खांचे बनाने के आरोप हैं, वह भी डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। वर्चुअल माध्यम से होगी अदालत में पेशी सूत्रों के मुताबिक, NCB संबंधित अदालतों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करेगी ताकि अक्षय छाबड़ा अपने लंबित मामलों की सुनवाई में वर्चुअल माध्यम से शामिल हो सके। वह स्क्रीन के जरिए अदालतों के समक्ष पेश होगा। जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष अगस्त में NCB ने PITNDPS अधिनियम के तहत अक्षय छाबड़ा को डिब्रूगढ़ जेल में एक वर्ष के लिए नजरबंद किया था। उसकी संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है और उनकी नीलामी की प्रक्रिया प्रस्तावित है। जांच एजेंसियों के अनुसार, छाबड़ा कथित तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का संचालन करता था और अटारी, मुंद्रा बंदरगाह तथा जम्मू-कश्मीर मार्गों के जरिए लगभग 1,400 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी से जुड़ा हुआ था। इस मामले में NCB ने 20 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें दो अफगान नागरिक भी शामिल थे। मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता नवंबर 2022 में लुधियाना निवासी संदीप उर्फ दीपा की गिरफ्तारी के बाद मिली थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी गिरफ्तारी के बाद अक्षय छाबड़ा और उसके पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
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