पूर्व AIG राजजीत सिंह की गिरफ्तारी, नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में थे वांछित

पूर्व AIG राजजीत सिंह की गिरफ्तारी, नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में थे वांछित

नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे पंजाब पुलिस के बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह ने आखिरकार पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने भी उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। राजजीत सिंह अक्टूबर 2019 से चर्चा में थे। उनके खिलाफ नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में कार्रवाई हुई थी। करीब छह वर्षों तक गिरफ्तारी से बाहर रहने के बाद उनका पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना इस मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजजीत सिंह को अप्रैल 2019 में सेवा से बर्खास्त किया गया था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच टीम की जांच में उन पर 2017 में बर्खास्त किए गए इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के साथ कथित मिलीभगत के आरोप सामने आए थे। जांच नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े नेटवर्क पर केंद्रित थी। इसके बाद वर्ष 2019 में राजजीत सिंह के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई हुई। पहला मामला विजिलेंस ब्यूरो की ओर से आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों से संबंधित था। दूसरा मामला स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की ओर से दर्ज किया गया था, जिसमें नशा तस्करों को कथित संरक्षण देने, लोगों को नशीले पदार्थों से जुड़े झूठे मामलों में फंसाने और उनसे जबरन पैसे वसूलने के आरोप लगाए गए थे। राजजीत सिंह ने अक्टूबर 2019 में हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को पुलिस की पकड़ से बाहर कर लिया था। इसके बाद वह लंबे समय तक फरार रहे। उनका नाम नशा तस्करी से जुड़े व्यापक मामले की जांच में भी सामने आया था। इस जांच का नेतृत्व तत्कालीन ईडी उप निदेशक निरंजन सिंह ने किया था। इसी व्यापक जांच में पूर्व डीएसपी जगदीश सिंह भोल्ला से जुड़े मामले भी सामने आए थे। सुप्रीम कोर्ट में आत्मसमर्पण की पेशकश सितंबर 2026 में राजजीत सिंह के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उनके आत्मसमर्पण की पेशकश की थी। इसके बाद उनके आत्मसमर्पण का रास्ता साफ हुआ और उन्होंने पटियाला पुलिस के समक्ष पेश होकर आत्मसमर्पण किया। राजजीत सिंह की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब पंजाब में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुख मुद्दे के तौर पर सामने रख रही है, जबकि विपक्षी दल लंबे समय से राजजीत सिंह की गिरफ्तारी में देरी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब पुलिस राजजीत सिंह से उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों को लेकर पूछताछ करेगी। गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।