अमित शाह के हरियाणा दौरे से पंजाब राजनीति पर नजर: भाजपा की पदयात्रा से सियासी गरमाहट, कांग्रेस ने दागे 8 सवाल

अमित शाह के हरियाणा दौरे से पंजाब राजनीति पर नजर: भाजपा की पदयात्रा से सियासी गरमाहट, कांग्रेस ने दागे 8 सवाल

पंजाब में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनावी शंखनाद किए जाने के ठीक एक दिन बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा की अगुवाई करने के लिए हरियाणा पहुंच रहे हैं।इससे पहले 1 नवंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रोहतक और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फरीदाबाद में मार्च निकालकर मतदाता सूचियों में 'वोट चोरी' के कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों का करारा जवाब दिया था। नितिन नवीन ने अपने संबोधन में 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाकर राहुल गांधी पर निशाना भी साधा था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भले ही हरियाणा में हाल-फिलहाल में चुनाव नहीं हैं, लेकिन भाजपा की इन ताजा गतिविधियों को अगले साल पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पंजाब दौरे और हरियाणा के सिख समुदाय के लिए किए गए विभिन्न ऐलान भी पंजाबी मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास माने जा रहे हैं।दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने अमित शाह के दौरे से ठीक पहले केंद्र और हरियाणा सरकार पर निशाना साधते हुए 8 तीखे सवाल पूछे हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने मांग की है कि गृह मंत्री अमित शाह 2024 के हरियाणा चुनावों में लगे 'वोट चोरी' के आरोपों पर स्पष्टीकरण दें और वोटर रिकॉर्ड्स की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करवाएं।कांग्रेस ने चुनाव आयोग की नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर रखे जाने के निर्णय पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। इसके अतिरिक्त, राज्य में बढ़ते अपराध, महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा, विरोध प्रदर्शन कर रहीं महिला पहलवानों से किए गए व्यवहार और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही मांगी गई है।कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री नायब सैनी के अक्सर राज्य से बाहर रहने पर तंज कसते हुए पूछा कि वे 'गैर-निवासी हरियाणवी' क्यों बनते जा रहे हैं। संजय दत्त ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा केवल बयानबाजी या नारेबाजी में नहीं, बल्कि जनता के सवालों के ईमानदारी से जवाब देने में होती है।