पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर ईडी छापे के बाद हरीश रावत का बड़ा फैसला, कांग्रेस के दो प्रमुख पदों से दिया इस्तीफा
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपने पूर्व निजी सचिव (ओएसडी) चंदन सिंह जीना के परिसरों से भारी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद होने के बाद पार्टी के दो प्रमुख संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। रावत ने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्य समय आने पर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।उल्लेखनीय है कि हरीश रावत उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) की कार्यकारिणी के सदस्य होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) में स्थायी आमंत्रित सदस्य की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।अपने फैसले की जानकारी देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी आचरण या घटनाक्रम से पार्टी का चल रहा राजनीतिक संघर्ष किसी भी तरह से कमजोर पड़े। रावत ने कहा, "इष्ट देवता का स्मरण करने के बाद मैंने यह बड़ा निर्णय लिया है। चूंकि मैं किसी सरकारी पद पर नहीं हूं, इसलिए वहां से इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यकारिणी का सदस्य और सीडब्ल्यूसी का स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं। मैं आदरपूर्वक इन दोनों पदों से त्यागपत्र दे रहा हूं ताकि मेरे कारण पार्टी का संघर्ष प्रभावित न हो।"इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बताया कि उसने वर्ष 2016 में आयोजित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) परीक्षा में हुई बड़े पैमाने की गड़बड़ियों के सिलसिले में देहरादून में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के तहत पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के आवास से 32 लाख रुपये की अघोषित नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां जब्त की गईं। हरीश रावत ने स्वीकार किया कि जीना ने उनके ओएसडी के रूप में सेवाएं दी थीं और सरकार तथा संगठन में उनके कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई थीं। जीना को एक "नम्र, मेहनती और निष्ठावान व्यक्ति" बताते हुए रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती के दौरान ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की बात साबित होती है और इसके सबूत सामने आते हैं, तो वे ऐसे कृत्य पर बेहद शर्मिंदा होंगे। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वे इस तरह के आरोपों को स्वीकार नहीं करते। आगामी राजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चुनावी परिस्थितियां बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा कि जब भी कोई उनसे पूछता था कि चुनाव कब होंगे, तो वे मजाकिया अंदाज में कहते थे कि जब सीबीआई उनके दरवाजे पर पहुंचेगी, तब चुनाव का समय समझा जाए। रावत ने आरोप लगाया कि इस बार सीधे उनके दरवाजे पर दस्तक देने के बजाय उनके किसी सहयोगी को निशाना बनाकर एक खास राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास किया गया है।उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहे हैं। राहुल गांधी भी 'स्टूडेंट्स की गूंज' कार्यक्रम के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यूकेएसएसएससी के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति पर सफाई देते हुए रावत ने कहा कि उनका चयन पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर हुआ था और शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने खुद अध्यक्ष को पद से हटाया था अथवा इस्तीफा ले लिया था। ईडी ने अपनी विज्ञप्ति में बताया कि यह पूरी कार्रवाई 10 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमਐਲए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, यूकेएसएसएससी के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, ओएमआर शीट प्रोसेसिंग से जुड़ी निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और संबंधित बिचौलियों के परिसरों पर तलाशी ली गई। इसी कड़ी में चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर भी छापा मारा गया, जिन्होंने 2014 से 2017 के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी के रूप में कार्य किया था।
Leave a Reply