आर्म्स लाइसेंस आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा: राजनीतिक शह पर अपराधियों ने बनवाए लाइसेंस, पुलिस ने दर्ज की FIR

आर्म्स लाइसेंस आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा: राजनीतिक शह पर अपराधियों ने बनवाए लाइसेंस, पुलिस ने दर्ज की FIR

पंजाब में लाइसेंसी हथियारों के वितरण में बड़े फर्जीवाड़े और अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कथित राजनीतिक संरक्षण और तथ्य छिपाकर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति भी शस्त्र लाइसेंस हासिल करने में सफल हो गए। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस समय पूरे पंजाब में 3.80 लाख से अधिक लोगों के पास लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं। नियमों का उल्लंघन कर लाइसेंस हासिल करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बठिंडा जिला राज्य में पहले स्थान पर आर्म्स लाइसेंस की संख्या के लिहाज से बठिंडा जिला पूरे पंजाब में पहले नंबर पर है, जहां 29 हजार से अधिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद 26 हजार से अधिक लाइसेंस के साथ मोगा जिला दूसरे स्थान पर है, जबकि शाही शहर पटियाला 25 हजार से अधिक लाइसेंस धारकों के साथ तीसरे स्थान पर आता है। इसके विपरीत, शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिले में सबसे कम लगभग 2,200 आर्म्स लाइसेंस धारक हैं। तथ्य छिपाकर और पता बदलकर बनवाए गए लाइसेंस जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि कई आपराधिक मामलों में नामजद आरोपियों ने अपनी पृष्ठभूमि छिपाकर लाइसेंस हासिल किए। जीरकपुर निवासी प्रॉपर्टी कारोबारी राज कुमार के खिलाफ जीरकपुर और दोराहा में आपराधिक केस दर्ज थे। अक्टूबर 2021 में जिला मजिस्ट्रेट मोहाली द्वारा उसका आवेदन रद्द किए जाने के बाद, उसने साल 2025 में आधार कार्ड पर मोगा का पता अपडेट करवाया और आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाकर 5 सितंबर 2025 को मोगा से लाइसेंस हासिल कर लिया तथा अक्टूबर 2025 में .30 बोर की पिस्टल भी खरीद ली। इसी व्यक्ति ने 2024 में फतेहगढ़ साहिब के गांव कोटला बजवाड़ा के पते पर पासपोर्ट भी बनवाया था। इसी तरह ड्रग तस्करी समेत कई मामलों का सामना कर रहे गुरविंदर सिंह ने भी साल 2024 में आर्म्स लाइसेंस हासिल करके पिस्टल और .315 बोर की राइफल खरीदी थी। इसके अलावा, संगरूर से संबंधित एक गैंगस्टर, जिस पर 20 आपराधिक मामले दर्ज थे, वह भी साल 2010 में मोगा का फर्जी पता दर्ज करवाकर लाइसेंस बनवाने में कामयाब रहा। पुलिस ने दर्ज किए मामले, आरोपी गिरफ्तार राज्य में आर्म्स लाइसेंस जारी करने के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत थाना प्रभारी, संबंधित डीएसपी और एसएसपी की सिफारिश के बाद ही जिला मजिस्ट्रेट द्वारा लाइसेंस जारी किया जाता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी जानकारी देकर लाइसेंस हासिल करने वाले आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि मामले की और गहनता से जांच की जाए तो कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।