अमरीका से जारी व्यापार तनाव के बीच चीन को कनाडा का निर्यात 30% बढ़ा, व्यापार घाटा भी घटा
- अंतरराष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव और 'ट्रेड वॉर' के माहौल के बीच कनाडा ने चीन को होने वाले अपने निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। स्टैटिस्टिक्स कनाडा के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में कनाडा का चीन को निर्यात 30 प्रतिशत बढ़कर 21.74 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस अवधि के दौरान दोनों देशों के बीच कुल वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार भी 3.6 प्रतिशत बढ़कर 66.6 अरब डॉलर दर्ज किया गया है। कनाडा-चाइना बिजनेस काउंसिल और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा के चाइना इंस्टीट्यूट की एक संयुक्त रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में आ रहे सुधार की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेज बढ़ोतरी अमेरिकी बाजार पर अपनी अति-निर्भरता को कम करने और वैश्विक स्तर पर व्यापार का विविधीकरण करने की कनाडा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कनाडा के निर्यात में इस उछाल का मुख्य आधार ऊर्जा और खनिज क्षेत्र रहे, जिनकी कुल घरेलू निर्यात में 58.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र, जिसमें कच्चा तेल और तरल प्रोपेन शामिल हैं, के निर्यात में 81.8 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई। इसके अलावा, तांबे सहित अन्य धातु अयस्कों और गैर-धातु खनिजों के निर्यात में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस वृद्धि को ट्रांस माउंटेन पाइपलाइन की क्षमता विस्तार से भी बल मिला, जिसने जून में अपनी 97 प्रतिशत क्षमता पर काम करते हुए एशियाई बाजारों तक कनाडाई तेल की पहुंच को सुगम बनाया। दूसरी ओर, चीन से कनाडा में होने वाले आयात में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच का व्यापार घाटा लगभग 25 प्रतिशत तक कम हो गया है। हालांकि, इसके बावजूद चीन अभी भी कनाडा के लिए आयात का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुए हालिया समझौतों ने भी इस व्यापारिक प्रगति में अहम भूमिका निभाई है। इस समझौते के तहत चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए कनाडाई बाजार के दरवाजे खुले हैं, और अब तक 15,603 चीनी ई-वाहन कनाडा पहुंच चुके हैं। इसके जवाब में चीन ने कनाडाई कृषि उत्पादों, विशेष रूप से कैनोला मील और मटर पर लगाए गए शुल्क को निलंबित कर दिया है तथा कैनोला बीजों पर सीमा शुल्क में कटौती की है। इस फैसले से कनाडाई किसानों को सीधा लाभ हुआ है और कैनोला की कीमतें 12 डॉलर प्रति बुशेल से बढ़कर 17 डॉलर प्रति बुशेल तक पहुंच गई हैं। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि चीन एक विशाल बाजार प्रस्तुत करता है, लेकिन किसी एक देश पर अधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है, इसलिए कनाडाई उद्योग एशिया-प्रशांत और यूरोप के अन्य बाजारों में भी अपने पैर पसार रहे हैं। यदि 2026 की पहली छमाही का यह सकारात्मक रुझान जारी रहता है, तो कनाडा सरकार द्वारा 2030 तक चीन को निर्यात में 50 प्रतिशत की वृद्धि का तय लक्ष्य समय से पहले भी हासिल किया जा सकता है।
Leave a Reply