बांग्लादेश में खसरे का भयंकर प्रकोप: 24 घंटे में 9 बच्चों की मौत, कुल मौतों का आंकड़ा 1,100 के करीब पहुंचा
- अंतरराष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
बांग्लादेश इस समय खसरे (Measles) के भीषण और अभूतपूर्व प्रकोप से जूझ रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समयानुसार) समाप्त हुए बीते 24 घंटों के दौरान इस बीमारी के लक्षणों के कारण 9 और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही वर्ष 2026 में खसरे से संबंधित पुष्टि किए गए और संदिग्ध मामलों के कारण हुई कुल मौतों की संख्या बढ़कर 1,096 तक पहुंच गई है। 24 घंटे में 1,200 से अधिक नए संदिग्ध मामले आए सामने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के अनुसार, हाल ही में हुई सभी 9 मौतों को संदिग्ध मामलों की श्रेणी में रखा गया है। 'यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ बांग्लादेश' (UNB) की रिपोर्ट के अनुसार, इन नई मौतों के साथ खसरे के कारण हुई संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 995 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि की गई मौतों का आंकड़ा 101 पर स्थिर है। बीते 24 घंटों में देश भर में खसरे के 1,228 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 188,041 हो गई है। इसी अवधि के दौरान 113 नए पुष्टि किए गए मामले सामने आए, जिससे लैब द्वारा पुष्ट मामलों की कुल संख्या 21,212 तक पहुंच गई है। DGHS के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से अब तक अस्पतालों में खसरे के संदिग्ध लक्षणों वाले 166,310 मरीजों को भर्ती कराया गया है, जिनमें से 159,519 मरीज ठीक हो चुके हैं। टीकाकरण में देरी और प्रशासनिक रुकावटें बनीं मुख्य वजह बांग्लादेश में मामलों में आई तेजी के बाद एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वकालत समूह ने इस प्रकोप को देश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर जन स्वास्थ्य संकटों में से एक करार दिया है। संगठन ने जोर देकर कहा कि यह बीमारी टीकाकरण के माध्यम से पूरी तरह से रोकथाम योग्य थी। कनाडा स्थित 'ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस' (GCDG) ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश्स 2026 मीजल्स आउटब्रेक' में खुलासा किया है कि यह संकट महामारी विज्ञान के दृष्टिकोण से कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान 2024-2025 में टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटों का परिणाम है। नियमित टीकाकरण से चूकना, अतिरिक्त टीकाकरण अभियानों को रद्द करना और टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी इसके मुख्य कारण रहे हैं। यूनिसेफ (UNICEF) की चेतावनियों को किया गया नजरअंदाज GCDG के अनुसार, बांग्लादेश लंबे समय से 'संयुक्त राष्ट्र बाल कोष' (UNICEF) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा स्वीकृत टीके खरीदता रहा था। हालांकि, पूर्व अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर 'ओपन टेंडर' के जरिए खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी थी। रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से बताया गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच 5 से 6 औपचारिक पत्रों और लगभग 10 बैठकों के माध्यम से अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित किल्लत के प्रति बार-बार चेतावनी दी थी, लेकिन समय पर उचित कदम न उठाए जाने के कारण आज देश को इस गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करना पड़ रहा है।
Leave a Reply