पंजाब में पराली जलाने के मामलों में बड़ा उछाल: एक ही दिन में 194 मामले आए सामने, तरनतारन सबसे आगे
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
पंजाब में खेतों में पराली (धान के अवशेष) जलाने की घटनाओं में अचानक तेजी दर्ज की गई है। बीते गुरुवार (29 अक्टूबर) को इस सीजन में एक ही दिन के भीतर पराली जलाने के सबसे ज्यादा 194 मामले सामने आए। इसके साथ ही राज्य में इस सीजन में खेतों में आग लगाने की कुल घटनाओं का आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच गया है। इससे पहले 18 अक्टूबर को एक दिन में सबसे अधिक 123 मामले दर्ज किए गए थे। तरनतारन जिला तालिका में सबसे ऊपर जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो तरनतारन कुल 397 घटनाओं के साथ राज्य में सबसे आगे बना हुआ है। वहीं अमृतसर 171 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि फिरोजपुर 104 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर आता है। हालांकि, पिछले वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में इस साल कुल मामलों में करीब 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2025 में इस अवधि तक 1,216 मामले सामने आए थे, जबकि इस सीजन में अब तक 1,007 घटनाएं दर्ज हुई हैं। गेहूं की बुवाई के कारण बढ़ सकता है दबाव विशेषज्ञों का अनुमान है कि 1 नवंबर से गेहूं की बुवाई का सीजन शुरू होने के कारण आने वाले दिनों में पराली जलाने के मामलों में और इजाफा हो सकता है। नवंबर के शुरुआती 15 दिन गेहूं की बिजाई के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, जिसके चलते किसानों पर धान की कटाई के बाद खेतों को जल्द से जल्द खाली करने का दबाव रहता है। इसके अलावा, हाल ही में आए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और बारिश के कारण कटाई के काम में देरी हुई है, जिससे अगली फसल की बिजाई से पहले अवशेष प्रबंधन के लिए समय कम बचा है। सरकार ने दिए 183 करोड़ रुपये की सब्सिडी मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद कई किसान पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को भी अपना रहे हैं। इनमें 'इन-सिचू' (खेत में ही अवशेष मिलाना) और 'एक्स-सिचू' (औद्योगिक उपयोग और बिजली उत्पादन के लिए पराली एकत्र करना) शामिल हैं। पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों ने 16,227 फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें खरीदी हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने 10,000 से अधिक मशीनों की खरीद पर किसानों को 183 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की है। मंत्री ने आगे बताया कि सरकार ने पराली प्रबंधन को और मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2026-27 के लिए 576 करोड़ रुपये की विस्तृत एक्शन प्लान तैयार की है। सरकार के निरंतर प्रयासों से राज्य में पराली जलाने की कुल घटनाओं में बीते सालों में 90 प्रतिशत तक की बड़ी कमी आई है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है।
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