ऑनलाइन ठगी के शिकार खाताधारकों को मिला न्याय: कंज्यूमर कोर्ट ने केनरा बैंक पर लगाया जुर्माना, 9% ब्याज के साथ रकम लौटाने के निर्देश
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
बैंक खाते से अनधिकृत रूप से पैसे निकल जाने के मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (स्टेट कंज्यूमर कमीशन), चंडीगढ़ ने खाताधारकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिला उपभोक्ता आयोग के पुराने आदेश में संशोधन करते हुए राज्य आयोग ने केनरा बैंक को शहर के निवासी सुमित छाबड़ा और उनकी पत्नी पायल छाबड़ा को ₹35,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। बैंक द्वारा पीड़ित दंपति के खाते से धोखाधड़ी से निकाली गई राशि को वापस (रिफंड) न करने और सेवा में कमी के चलते यह कार्रवाई की गई है। क्या था पूरा मामला? शिकायतकर्ता सुमित छाबड़ा और उनकी पत्नी पायल छाबड़ा का केनरा बैंक, सेक्टर-34 चंडीगढ़ में पिछले 10 से अधिक वर्षों से एक संयुक्त बचत खाता (जॉइंट सेविंग्स अकाउंट) चल रहा है। 25 अक्टूबर 2023 को उनके खाते से ₹24,998 और ₹19,999 के दो फर्जी लेनदेन हुए, जिससे कुल ₹44,997 की राशि अनधिकृत रूप से निकाल ली गई। धोखाधड़ी का पता चलते ही खाताधारकों ने तुरंत बैंक से संपर्क किया, आवश्यक फॉर्म व विवरण जमा किए और बैंक के निर्देशानुसार उसी दिन साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। बाद में लगातार पत्राचार करने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, बैंक ने यह कहते हुए रिफंड देने से इनकार कर दिया कि लाभार्थी बैंक (Beneficiary Bank) ने दावा खारिज कर दिया है। इसके बाद दंपति ने बैंक की सुरक्षा खामियों और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया था। राज्य आयोग ने बढ़ाया मुआवजा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I, यूटी चंडीगढ़ ने 02 फरवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए केनरा बैंक को डिडक्शन की तारीख से 9% वार्षिक ब्याज के साथ ₹44,997 लौटाने और ₹7,000 मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, इस राहत से असंतुष्ट होकर पीड़ितों ने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर राज्य आयोग में अपील दायर की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य कंज्यूमर कमीशन ने माना कि राशि बैंक की सुरक्षित हिरासत में थी और सुरक्षा खामियों के कारण हुए अनधिकृत लेनदेन के लिए बैंक ही जिम्मेदार है। आयोग ने जिला आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए केनरा बैंक को ₹44,997 की पूरी राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के साथ-साथ मानसिक व शारीरिक परेशानी, सेवा में कमी और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में ₹35,000 का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश जारी किया।
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