परविंदर झोटा मामला: 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' के कई नेता नजरबंद, मानसा मोर्चे में शामिल होने से रोका
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड मामले में इंसाफ की मांग को लेकर मानसा में जारी मोर्चे के दौरान पंजाब पुलिस द्वारा लखा सिधाना और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्रवाई के विरोध में आज 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मानसा मोर्चे में शामिल होने का आह्वान किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के मानसा पहुंचने से पहले ही पंजाब पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए संगठन के कई प्रमुख नेताओं को उनके घरों में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया है। इसी कार्रवाई के तहत अमृतसर में बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे पार्टी के राज्य मीडिया प्रभारी शमशेर सिंह पद्धरी को पुलिस टीम ने उनके निवास स्थान पर नजरबंद कर दिया। अपने घर के बाहर पुलिस बल की तैनाती का विरोध करते हुए भाई पद्धरी ने पंजाब सरकार पर कड़ा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार लोकतांत्रिक ढांचे में इंसाफ और जन-अधिकारों के लिए उठने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। शमशेर सिंह पद्धरी ने कहा कि सरकार तानाशाही रवैया अपनाकर पंजाब के लोगों के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की दमनकारी पुलिस कार्रवाइयों से इंसाफ की लड़ाई को रोका नहीं जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के अधिकारों का हनन करने वाली सरकार को आने वाले समय में जन-रोष का सामना करना पड़ेगा। गौरतलब है कि अमृतसर के अलावा पंजाब के अन्य जिलों से भी संगठन से जुड़े कई स्थानीय नेताओं और प्रमुख कार्यकर्ताओं को तड़के ही उनके घरों में नजरबंद किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। पुलिस प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मानसा में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना और मोर्चे पर भीड़ एकत्र होने से रोकना बताया जा रहा है।
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