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रामावतार जग्गी हत्या केस: हाई कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

07 Apr, 2026 11:12 AM

बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्या मामले में हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र Amit Jogi को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला घटना के लगभग 20 साल बाद आया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जब सभी आरोपी एक ही अपराध के दोषी पाए जाते हैं, तो किसी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि समान साक्ष्यों के आधार पर एक आरोपी को बरी करना और दूसरे को दोषी ठहराना उचित नहीं है, जब तक कि इसके लिए कोई ठोस और अलग कारण न हो। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Arvind Verma की विशेष खंडपीठ ने सुनाया। अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद का प्रावधान रखा गया है। हाई कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होगी। गौरतलब है कि 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता Ramavatar Jaggi की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से बाल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की एक विशेष अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इसके बाद रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे बाद में हाई कोर्ट को सौंप दिया गया था।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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