एलपीयू में तोड़फोड़ और आगजनी पर उठे सवाल, हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर लगाई सीबीआई जांच की गुहार

एलपीयू में तोड़फोड़ और आगजनी पर उठे सवाल, हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर लगाई सीबीआई जांच की गुहार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर अदालत बुधवार को सुनवाई कर सकती है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगी। विद्यार्थी रवि राज द्वारा दायर इस याचिका में घटना के पीछे राजनीतिक कारणों और गहरी साजिश की ओर इशारा किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ. अशोक कुमार मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं, जिन्होंने अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था। राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए इस घटना के राजनीतिक तार जुड़े होने का अंदेशा जताया गया है। अफवाह के बाद भड़की हिंसा और राष्ट्रीय राजमार्ग जाम याचिका में दी गई जानकारी के अनुसार, 26 सितंबर की रात परिसर में एक कर्मचारी द्वारा छात्रा से दुष्कर्म करने और यूनिवर्सिटी द्वारा आरोपी को घर भेजे जाने की अफवाह फैल गई थी। इसके बाद करीब 2,000 छात्र हॉस्टल के बाहर एकत्र हो गए और रात लगभग 2 बजे फगवाड़ा-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। इस दौरान छात्रों और बाहरी तत्वों ने कथित तौर पर इमारतों में आग लगा दी, दरवाजे-शीशे तोड़ दिए और स्टाफ के सदस्यों पर हमला किया। हथियारबंद बाहरी तत्वों द्वारा तोड़फोड़ और लूटपाट के गंभीर आरोप याचिकाकर्ता ने गंभीर आरोप लगाया है कि करीब 30 वर्ष की आयु के कई बाहरी लोग चेहरे ढककर, हथियारों और वॉक-टॉक से लैस होकर यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल हुए। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों, कंप्यूटरों, एटीएम और दुकानों को नुकसान पहुंचाया और जमकर लूटपाट की। याचिका के अनुसार, यह हमला यूनिवर्सिटी को बदनाम करने और राज्य का माहौल खराब करने की पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा था। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले चितकारा यूनिवर्सिटी में भी इसी तरह की अफवाहों के कारण हिंसा की घटना सामने आई थी। पुलिस की ढिलाई और त्वरित एफआईआर पर खड़े किए सवाल याचिका में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, पुलिस को रात 1:45 बजे ही भीड़ जमा होने की सूचना मिल चुकी थी, इसके बावजूद घंटों तक हिंसा और तोड़फोड़ को रोका नहीं गया। पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में दुष्कर्म की बात को महज अफवाह करार दिया था, लेकिन बाद में बिना किसी पुष्टि के अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई।