खजूरी खास हिंसा केस में अदालत का फैसला, तीन लोगों को ठहराया दोषी
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि आरोपी उस गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे, जिसने खजूरी खास इलाके में हिंसा के दौरान पुलिस बल पर पथराव किया और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के काम में बाधा डाली। यह मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह की अदालत में चल रहा था। अदालत ने इकराम, सरफराज और मुस्तकीम के खिलाफ दंगा करने, गैरकानूनी रूप से एकत्र होने और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने से जुड़े आरोपों पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। 18 मई को जारी आदेश में अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि पूरी घटना के दौरान भीड़ लगातार पुलिस बल पर पथराव कर रही थी। इससे सरकारी कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी निभाने में बाधा पहुंची और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा पुलिस बूथ और करावल नगर रोड के पास हुई हिंसा में ये तीनों आरोपी शामिल थे। आरोप है कि उस दौरान उग्र भीड़ ने दुकानों, रेहड़ियों और एक पुलिस बूथ को आग लगा दी थी तथा पुलिसकर्मियों पर पथराव किया था। पुलिस के मुताबिक, इलाके में गश्त कर रहे अधिकारियों ने भीड़ को कई बार वहां से हटने के लिए कहा था और धारा 144 लागू होने की घोषणा भी की गई थी। इसके बावजूद हालात हिंसक हो गए और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। बाद में खजूरी खास थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ दंगा भड़काने, गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और हथियारों से लैस होने समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस बूथ को आग लगाने और सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। अदालत ने यह भी माना कि भारतीय दंड संहिता की धारा 148 के तहत लगाए गए घातक हथियार रखने के आरोप भी आरोपियों के खिलाफ साबित नहीं हो सके।
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