पंजाब में सरपंच मानदेय विवाद, 10 साल का बकाया जारी करने की तैयारी

पंजाब में सरपंच मानदेय विवाद, 10 साल का बकाया जारी करने की तैयारी

पंजाब सरकार ने राज्य के करीब आठ हजार सरपंचों को सरकारी खजाने से मानदेय देने से दूरी बना ली है। वहीं, सरकार अब लगभग 5,228 ऐसे सरपंचों को मानदेय देने की तैयारी में है, जिनकी पंचायतों के पास आय का कोई साधन नहीं है। इस संबंध में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को आने वाले दिनों में आवश्यक बजट मिलने की संभावना है। जानकारी के अनुसार पंचायत विभाग की ओर से वित्त विभाग के साथ इस मुद्दे पर औपचारिक पत्राचार किया जा रहा था और अब वित्त विभाग ने इसके लिए सहमति दे दी है। राज्य में 5,228 ऐसी पंचायतें हैं, जिनके पास अपनी आय का कोई स्रोत नहीं है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों को पत्र जारी कर आय रहित पंचायतों का पूरा विवरण मांगा है। विभाग ने पूछा है कि ऐसी पंचायतों ने अब तक सरपंचों को कितना मानदेय दिया है और आगे मानदेय देने के लिए कितने बजट की आवश्यकता होगी। विभाग के पत्र में कहा गया है कि 5,228 पंचायतों के पूर्व सरपंचों को पिछले दस वर्षों का मानदेय तथा नए निर्वाचित सरपंचों को 31 मार्च 2026 तक का मानदेय दिया जाना है। इसके लिए बजट उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया चल रही है। पंचायत विभाग ने एक सप्ताह के भीतर जानकारी एकत्र कर बजट आवंटित करने का आश्वासन भी दिया है। पंजाब में इस समय कुल 13,236 पंचायतें हैं, जिनमें से 8,008 पंचायतों के पास आय के अपने साधन मौजूद हैं। राज्य सरकार पहले ही यह फैसला कर चुकी है कि जिन पंचायतों के पास आय के स्रोत हैं, वहां के सरपंचों को पंचायत की आय से ही मानदेय दिया जाएगा। इस फैसले के बाद सरकार करीब आठ हजार सरपंचों को सरकारी खजाने से मानदेय देने की जिम्मेदारी से मुक्त हो गई है। इस बीच, पंजाब के पूर्व सरपंचों ने मानदेय प्राप्त करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। पंचायत विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि 5,228 सरपंचों को जल्द मानदेय जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने पिछले वर्ष 24 अप्रैल को पंचायत दिवस के अवसर पर सरपंचों का मासिक मानदेय 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने की घोषणा की थी। हालांकि कई सरपंच अब भी मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। लुधियाना जिले के गांव भागपुर के नए सरपंच गगनदीप सिंह ने बताया कि उन्हें करीब 18 महीनों से मानदेय नहीं मिला है और पहली किस्त भी जारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरपंचों के दैनिक खर्चों के मुकाबले 2,000 रुपये का मानदेय बहुत कम है और वह भी दिसंबर 2024 से नहीं मिला। वहीं, बरनाला जिले के गांव रायसर के सरपंच बचित्तर सिंह ने कहा कि उन्हें न तो कोई ग्रांट मिली है और न ही मानदेय। उन्होंने स्वयं को शिरोमणि अकाली दल से जुड़ा बताया। सूत्रों के अनुसार सरपंचों को 2,000 रुपये मासिक मानदेय देने के लिए सालाना लगभग 31.77 करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता होगी।