सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश याचिकाकर्ता की मांग ठुकराई
Supreme Court of India ने दुबई में रह रहे एक भारतीय नागरिक आसिफ आजाद की याचिका पर कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने दुबई अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न और उस पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध (ट्रैवल बैन) को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई Surya Kant और Justice Bagchi की पीठ ने की। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी समस्या के समाधान के लिए यूएई में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करे। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब केरल के निवासी और पेशे से इंजीनियर आसिफ आजाद ने दुबई के एक शॉपिंग मॉल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में अपनी बात रखी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने उनसे उनकी लोकेशन के बारे में पूछा, जिस पर उन्होंने बताया कि वह मॉल में हैं। इसके बाद अदालत ने पूछा कि भारतीय दूतावास कितनी दूरी पर है, जिस पर याचिकाकर्ता ने करीब 20 किलोमीटर दूरी बताई। इस पर अदालत ने कहा कि दूतावास जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध है और उन्हें वहीं जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे एक ड्रग माफिया द्वारा साजिश के तहत फंसाया गया है और उसके नाम पर फर्जी चेक तैयार किए गए हैं, जिसके चलते दुबई की अदालत ने उस पर यात्रा प्रतिबंध लगाया है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे अवैध प्रवासी बताया जा रहा है और रात के समय उसके साथ मारपीट की गई, जिसके प्रमाण सीसीटीवी में मौजूद हैं। उसने अपनी जान को खतरा बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) की बहाली की मांग की। इसके अलावा, आसिफ आजाद ने यह भी कहा कि केरल के कुछ विधायक उसके खिलाफ हैं और राज्य में उसके खिलाफ चल रही जांच एकतरफा है। हालांकि, अदालत ने उसकी दलीलों को पूरी तरह स्वीकार करने में असमर्थता जताई। मुख्य न्यायाधीश ने केरल में हालिया राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि बदले हुए हालात का लाभ उठाया जा सकता है। अंत में, अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस तरह दूर बैठे मामलों में प्रत्यक्ष सहायता प्रदान नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता को सलाह दी गई कि वह यूएई में भारतीय दूतावास के पास जाकर औपचारिक रूप से मदद ले, जहां उसे कानूनी सहायता मिल सकती है।
Posted By: Daily Suraj Bureau