मध्य पूर्व युद्ध का असर: भारत में CNG और PNG की कीमतें बढ़ने की आशंका

मध्य पूर्व युद्ध का असर: भारत में CNG और PNG की कीमतें बढ़ने की आशंका

मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। कतर में गैस उत्पादन रुकने के बाद भारत में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, ईरानी ड्रोन हमले के बाद भारत के सबसे बड़े गैस आपूर्तिकर्ता कतर ने अपने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) संयंत्र में उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके कारण भारत के लिए गैस लेकर आने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और घरेलू बाजार में गैस आपूर्ति लगभग 40 प्रतिशत तक घट गई है। उल्लेखनीय है कि भारत अपनी LNG जरूरतों का करीब 40 प्रतिशत, यानी लगभग 27 मिलियन टन प्रति वर्ष, कतर से आयात करता है। विदेशों से आयात की गई LNG को गैस में परिवर्तित कर CNG और PNG के रूप में आपूर्ति की जाती है। आपूर्ति में इस व्यवधान के कारण शहरी गैस वितरण कंपनियों (CGD) ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो CNG और PNG की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती होर्मुज़ जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने की स्थिति है। यह एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश तेल और गैस का निर्यात करते हैं। ईरान और इज़राइल के बीच जारी युद्ध के कारण यह मार्ग अब सुरक्षित नहीं माना जा रहा है, जिसके चलते जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। बताया गया है कि 28 फरवरी को इस मार्ग से 91 जहाज गुजरे थे, जबकि अब यह संख्या घटकर केवल 26 रह गई है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 50 प्रतिशत और LNG की जरूरतों का करीब 54 प्रतिशत इसी मार्ग से आयात करता है। इस बीच, पेट्रोनेट के तीन बड़े जहाज – दिशा, राही और असीम – फिलहाल कतर के रास लाफान बंदरगाह तक पहुंचने में असमर्थ हैं। कतर एनर्जी के अनुसार, ईरान ने कतर के रास लाफान और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी स्थित उसके संयंत्रों पर ड्रोन से हमला किया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण कंपनी ने LNG उत्पादन को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिका और इज़राइल ने ईरानी ठिकानों पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में अमेरिकी ठिकानों और बंदरगाहों को निशाना बनाया। इसी दौरान कतर के रास लाफान स्थित संयंत्र पर ड्रोन हमला किया गया, जिसके बाद LNG उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। भारत में आयातित LNG का उपयोग केवल घरेलू गैस आपूर्ति और वाहनों के लिए ही नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन और यूरिया (खाद) निर्माण में भी किया जाता है। यदि गैस आपूर्ति में कमी बनी रहती है, तो गैस आधारित बिजली संयंत्रों से बनने वाली बिजली महंगी हो सकती है। इसके अलावा, गैस उर्वरक उद्योग के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए इसकी कमी खाद उत्पादन को भी प्रभावित कर सकती है।