आम और मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना मुश्किल, हाई कोर्ट ने जताई चिंता

आम और मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना मुश्किल, हाई कोर्ट ने जताई चिंता

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ट्राइसिटी क्षेत्र में रिहायशी प्लॉटों और फ्लैटों की तेजी से बढ़ती कीमतों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी हाउसिंग एजेंसियां मुनाफे को अधिक महत्व दे रही हैं, जिसके कारण आम नागरिकों और मध्यम वर्ग के लिए अपना घर खरीदना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। यह टिप्पणी उस समय आई जब जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मंचंदा की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को निर्देश दिया कि वे किफायती आवास के उद्देश्य को पुनः स्थापित करने के लिए एक उपयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करें। अदालत ने कहा कि प्रस्ताव में लॉटरी प्रणाली (लॉट ड्रॉ) जैसे उपाय भी शामिल किए जाएं, ताकि रिहायशी प्लॉट वेतनभोगी और मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच में रह सकें। सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में सरकारी एजेंसियों द्वारा प्लॉट और फ्लैट की नीलामी जिन कीमतों पर की जा रही है, उसने घर खरीदना पेशेवरों, वेतनभोगी वर्ग और समाज के अन्य कम संपन्न वर्गों के लिए लगभग असंभव बना दिया है। अदालत ने कहा कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा ट्राइसिटी में जिन दरों पर संपत्तियों की नीलामी की जा रही है, वे आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं। अदालत ने बढ़ती संपत्ति कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन को व्यवहारिक और सुलभ नीतियां पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से कहा कि ऐसी नीति तैयार की जाए जिससे मध्यम और कम आय वर्ग के लोग भी अपना घर खरीद सकें। अदालत ने किफायती आवास से संबंधित ठोस प्रस्ताव 24 मार्च तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। पीठ ने आगे कहा कि संबंधित एजेंसियों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन होने के बावजूद वे आम लोगों के लिए किफायती आवास को बढ़ावा देने के बजाय अत्यधिक कीमतों पर प्लॉटों की नीलामी कर रही हैं। नीलामी प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यों ने मुनाफा कमाने पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया है, जिससे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इस मुद्दे को संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए अदालत ने कहा कि आश्रय तक पहुंच जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार में आवास और किफायती घर का अधिकार भी शामिल है। इसलिए किफायती आवास उपलब्ध कराना राज्यों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरियाणा, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ सरकारें समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से वेतनभोगी और मध्यम वर्ग के लिए किफायती आवास सुनिश्चित करने के लिए लॉट ड्रॉ सहित अन्य उपायों के साथ एक ठोस प्रस्ताव पेश करें। अदालत ने मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता श्रीनाथ ए. खेमका को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है और अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की है।