पावरकॉम का बड़ा यू-टर्न: बॉन्ड के जरिए 10 हजार करोड़ जुटाने की योजना रद्द, अब बैंक से लेगा 5500 करोड़ का कर्ज

पावरकॉम का बड़ा यू-टर्न: बॉन्ड के जरिए 10 हजार करोड़ जुटाने की योजना रद्द, अब बैंक से लेगा 5500 करोड़ का कर्ज

पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) ने बॉन्ड के जरिए 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की अपनी पूर्व योजना को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके स्थान पर अब पावरकॉम पंजाब सरकार की गारंटी पर विभिन्न बैंकों से 5,500 करोड़ रुपये का कर्ज लेगा। उल्लेखनीय है कि जब पावरकॉम द्वारा बॉन्ड के माध्यम से पूंजी जुटाने और इस प्रक्रिया के एवज में करीब 150 करोड़ रुपये की भारी-भरकम मध्यस्थता (अरेंजर) फीस देने का कदम उठाया गया था, तो राज्य में इसको लेकर काफी तीखा विरोध देखने को मिला था। विपक्षी दलों ने इस अनावश्यक फीस को लेकर सत्ताधारी दल की जमकर आलोचना की थी। इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी गमाडा (GMADA) द्वारा उठाए जाने वाले कर्ज और दी जाने वाली मध्यस्थता फीस को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पावरकॉम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 30 सितंबर को हुई अहम बैठक में बॉन्ड के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया गया। इस बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बॉन्ड के मुकाबले बैंकों से मिलने वाला कर्ज अधिक किफायती और सस्ता है। हालांकि बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने का फैसला रद्द कर दिया गया है, लेकिन पावरकॉम की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 5,500 करोड़ रुपये का कर्ज लेना अभी भी अनिवार्य बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि पंजाब सरकार की ओर से पावरकॉम को मिलने वाली बिजली सब्सिडी का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया से पहले मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके तहत चुनी जाने वाली संस्था को अरेंजर फीस के रूप में 150 करोड़ से 177 करोड़ रुपये तक का भुगतान किया जाना था। मर्चेंट बैंकर के माध्यम से ‘नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर’ (एनसीडी) या बॉन्ड जारी करने का यह मुद्दा 20 अगस्त को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में विचारा गया था, जिसे बाद में लेखा समिति को भेज दिया गया था। उस दौरान तीन प्रमुख मर्चेंट बैंकरों—ट्रस्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, रियल ग्रोथ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड और ए के कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड ने अपनी बोलियां जमा कराई थीं। इनमें से सबसे कम बोली ए के कैपिटल सर्विसेज ने लगाई थी, जिसने जुटाई जाने वाली 10,000 करोड़ की राशि पर 1.5 प्रतिशत (लगभग 150 करोड़ रुपये) मध्यस्थता फीस की मांग की थी। वहीं, ट्रस्ट इन्वेस्टमेंट ने 1.73 प्रतिशत (173 करोड़) और रियल ग्रोथ सिक्योरिटीज ने 1.77 प्रतिशत (177 करोड़) फीस का प्रस्ताव रखा था। ये सभी संस्थान सेबी (SEBI) के पास पंजीकृत हैं। ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) के अनुसार, बॉन्ड और एनसीडी के माध्यम से यह फंड जुटाने का मुख्य उद्देश्य राज्य की बिजली कंपनी के पूंजीगत खर्चों की आवश्यकताओं को पूरा करना था। इन फंडों को दो चरणों में 5,000-5,000 करोड़ रुपये करके जुटाया जाना तय किया गया था। पावरकॉम की वर्तमान वित्तीय स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कुछ समय पूर्व ही केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी संसद में एक चर्चा के दौरान पावरकॉम की कमजोर वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाए थे।