दिलरोज हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मासूम को जिंदा दफनाने वाली पड़ोसी महिला की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली

दिलरोज हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मासूम को जिंदा दफनाने वाली पड़ोसी महिला की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली

पंजाब के लुधियाना में बहुचर्चित मासूम दिलरोज हत्याकांड में माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मासूम बच्ची को जिंदा दफनाकर उसकी हत्या करने वाली पड़ोसी महिला की फांसी (मृत्युदंड) की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, दोषी महिला को अब 30 साल की जेल काटनी होगी और इस पूरी अवधि के दौरान उसे सजा में किसी भी तरह की कानूनी छूट नहीं दी जाएगी। इससे पहले, लगभग दो साल पहले सत्र न्यायालय (सेशन कोर्ट) ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। खिलौनों को लेकर मन में उपजी थी ईर्ष्या मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, दोषी महिला ने मासूम दिलरोज की हत्या सिर्फ इस ईर्ष्या में कर दी थी क्योंकि दिलरोज के पिता अपनी बेटी के लिए अक्सर नए खिलौने और अन्य सामान खरीद कर लाते थे। दिलरोज के खिलौनों को देखकर दोषी महिला के अपने बच्चे भी उससे वैसे ही खिलौनों की मांग करते थे। आर्थिक तंगी के कारण वह अपने बच्चों की ये मांगें पूरी करने में असमर्थ थी, जिससे कुंठित होकर उसने रंजिश में आकर मासूम बच्ची को जिंदा दफनाकर मारने की खौफनाक साजिश रची। एक्टिवा पर ले जाकर सुनसान जगह में किया था जिंदा दफन यह दुखद और रूह कंपा देने वाली घटना 28 नवंबर, 2021 को घटी थी। दोषी महिला बच्ची दिलरोज को अपनी एक्टिवा पर बैठाकर एक सुनसान इलाके में ले गई, जहां उसने पहले से खोदे गए एक गड्ढे में बच्ची को जिंदा दफना दिया। बच्ची के लापता होने के बाद जब इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले गए, तो महिला बच्ची को स्कूटी पर ले जाती हुई दिखाई दी। पुलिस पूछताछ के दौरान दोषी महिला ने अपना गुनाह कबूल कर लिया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर बच्ची का शव बरामद किया गया था। दो साल पहले सेशन कोर्ट ने महिला को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने 30 साल की बिना किसी राहत वाली जेल में तब्दील कर दिया है।