पंचायती राज नियमों में संशोधन, आरक्षण रोस्टर में होगा बदलाव

पंचायती राज नियमों में संशोधन, आरक्षण रोस्टर में होगा बदलाव

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में आज महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सतलुज और घग्गर नदियों के किनारे स्थित क्षेत्रों में किसानों को अपनी जमीन से गाद (डीसिल्टिंग) निकालने की अनुमति दे दी गई है। इस फैसले के तहत संबंधित जमीनों के मालिक किसान अब अपनी भूमि से जमा गाद निकाल सकेंगे। सरकार ने इस उद्देश्य के लिए 9 संवेदनशील डीसिल्टिंग साइटों की पहचान की है, जहां किसानों को अपनी लागत पर गाद निकालने की अनुमति दी जाएगी। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान किसानों के खेतों में बड़ी मात्रा में रेत जमा हो गई थी। उस समय “जिसका खेत, उसकी रेत” योजना को मंजूरी दी गई थी। उन्होंने बताया कि अब सतलुज और घग्गर नदियों के किनारे स्थित 9 ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां किसान अनुमति लेकर डीसिल्टिंग कर सकेंगे। यह कदम बाढ़ से बचाव और भविष्य में बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से उठाया गया है। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, किसान अपनी जमीन से निकाली गई रेत या मिट्टी का उपयोग अपनी जरूरत के अनुसार नि:शुल्क कर सकेंगे। यह अनुमति 30 जून 2026 तक सीमित अवधि के लिए दी गई है। जिन प्रमुख साइटों की पहचान की गई है, उनमें हर्षा बेला, मंडला ताजोवाल, रुकनेवाला, खैरा बेट, बुर्ज चहलां और कराली शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब कैबिनेट ने पंजाब पंचायती राज नियम, 1994 में भी संशोधन को मंजूरी दी है। इस संशोधन के बाद जिला परिषदों के चेयरमैन और उप-चेयरमैन के पदों के आरक्षण के रोस्टर में बदलाव किया जाएगा। वित्त मंत्री चीमा ने बताया कि राज्य के छह जिलों—मोहाली, पटियाला, मलेरकोटला, संगरूर, फिरोजपुर और फाजिल्का—की सीमाओं में बदलाव हुआ है, जिसके चलते कुछ गांवों का एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण हुआ है। इसी कारण इन जिलों में जिला परिषदों के आरक्षण रोस्टर में भी संशोधन किया जाएगा।