सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार, तय समय और निर्धारित प्रकार की मिलेगी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार, तय समय और निर्धारित प्रकार की मिलेगी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली और आगामी त्योहारी सीजन के दौरान पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। अदालत ने इस मामले में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत करते हुए कहा है कि त्योहार के दौरान तय समय सीमा के भीतर अनुमति प्राप्त प्रकार के पटाखे ही चलाए जा सकेंगे। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत न तो पटाखों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के पक्ष में है और न ही इन्हें चौबीस घंटे चलाने की अनुमति दी जा सकती है। पीठ ने इसके दो मुख्य कारण बताते हुए कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से लोगों की भावनाओं पर असर पड़ता है, जबकि पूरे दिन पटाखे चलाने से बुजुर्गों, बीमार लोगों, बच्चों और अन्य जीवों पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है। अदालत का उद्देश्य एक ऐसा व्यावहारिक समाधान निकालना है जिसमें तय समय और अधिकृत पटाखों का निर्धारण किया जा सके। यह मामला वर्ष 2015 की एक कानूनी कार्रवाई से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत शीर्ष अदालत अक्टूबर से जनवरी के बीच दिल्ली और अन्य वायु प्रदूषण से प्रभावित राज्यों में पटाखों के उपयोग को सीमित करने के निर्देश देती रही है। हालांकि, इससे पहले अक्टूबर 2025 में शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दीवाली के दिन 'ग्रीन क्रैकर्स' (हरे पटाखों) के इस्तेमाल की अनुमति देकर कुछ ढील दी थी। सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह बेरियम-आधारित पटाखों के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर अपनी रिपोर्ट पेश करे। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटिया ने इस रिपोर्ट को अदालत के रिकॉर्ड पर लाने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा है, क्योंकि इस प्रकार के पटाखों की बाहरी टेस्टिंग अभी पूरी होनी बाकी है। इसके साथ ही, पीठ ने यह भी संकेत दिया कि वह लड़ी वाले (श्रृंखलाबद्ध) पटाखों के निर्माण की अनुमति देने के सुझाव पर भी विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान एक वकील ने आने वाले महीनों में पराली जलाने और पटाखों के कारण दिल्ली में प्रदूषण स्तर बढ़ने की आशंका जताते हुए चिंता व्यक्त की। हालांकि, पीठ ने यह साफ कर दिया कि वह बिना किसी नियम के पटाखों के मुक्त इस्तेमाल की छूट नहीं देगी, बल्कि केवल विशिष्ट समयावधि के तहत ही अनुमति पर विचार करेगी। वहीं, पटाखा निर्माताओं की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर ने अनुरोध किया कि प्रतिबंधों की समीक्षा करते समय केवल दिल्ली को ही अलग से न देखा जाए।