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E20 पर बड़ा फैसला: डीजल में एथेनॉल मिलाने की योजना सरकार ने की रद्द

11 Aug, 2026 12:57 PM

केंद्र सरकार ने परीक्षण के बाद डीजल में एथेनॉल मिलाने की योजना को रद्द करने का फैसला किया है। परीक्षण के दौरान पाया गया कि एथेनॉल मिलाने से डीजल का फ्लैश प्वाइंट काफी कम हो जाता है, जिससे ईंधन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में बताया कि सरकारी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अधिकृत प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के माध्यम से एथेनॉल-डीजल मिश्रणों का परीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि परीक्षण में पाया गया कि एथेनॉल मिश्रित डीजल निर्धारित फ्लैश प्वाइंट मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। एथेनॉल की मौजूदगी के कारण इसका फ्लैश प्वाइंट काफी कम हो गया था। कम फ्लैश प्वाइंट से आग और सुरक्षा का जोखिम बढ़ सकता है। इससे ईंधन की हैंडलिंग, भंडारण और परिवहन के दौरान आग लगने की संभावना बढ़ जाती है। इसी वजह से सरकार ने डीजल में एथेनॉल मिलाने पर रोक लगाने का फैसला किया है। पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल पर अभी कोई फैसला नहीं एक अन्य सवाल के जवाब में सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को 20 फीसदी से अधिक बढ़ाने के संबंध में अभी सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिश्रण को लेकर भविष्य में कोई भी फैसला विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययनों के बाद ही लिया जाएगा। इसके साथ ही वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों सहित सभी संबंधित हितधारकों से सलाह-मशविरा किया जाएगा। कई संस्थाएं E20 कार्यक्रम में शामिल मंत्री के अनुसार, नीति आयोग, वाहन निर्माता, तेल विपणन कंपनियां (OMCs), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और अन्य तकनीकी संस्थानों ने एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के चरणबद्ध क्रियान्वयन में हिस्सा लिया है। सरकार ने बताया कि E20 को लेकर ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, IIP और विभिन्न क्षेत्रों में वाहन निर्माताओं द्वारा व्यापक लैब तथा फील्ड ट्रायल किए गए हैं। इन परीक्षणों में इंजन की टिकाऊ क्षमता, संचालन क्षमता, स्टार्टिंग क्षमता, संक्षारण प्रतिरोध, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता समेत कई पहलुओं का आकलन किया गया।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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