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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग

25 Sep, 2026 02:58 PM

मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कानूनी कर्तव्यों के कथित उल्लंघन को लेकर भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दाखिल की गई है। एकतरफा फैसलों को रद्द करने की मांग याचिका में मांग की गई है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कथित रूप से लिए गए निर्णयों, जारी निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए संशोधनों को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए। इसके साथ ही, SIR प्रक्रिया से जुड़े ऐसे सभी फैसलों को गैर-कानूनी घोषित करने और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले मूल 'फॉर्म 6' को दोबारा बहाल करने का भी अनुरोध किया गया है। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की SIT जांच की मांग याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटा दिए गए हैं। इस गंभीर मामले की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अपने कानूनी कर्तव्यों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना पर भी आपराधिक मुकदमा चलाने की अपील की गई है। आंतरिक मतभेदों की रिपोर्ट बनी आधार यह याचिका 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट के सामने आने के बाद दायर की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों, आदेशों, फॉर्म 6 में बदलाव, डेटा प्रबंधन और मतदाताओं के नाम हटाने या बहाल करने जैसे मुद्दों पर कम से कम 14 मौकों पर आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। याचिका में कहा गया है कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में फैसलों को लेकर लगातार मतभेद देखे गए हैं और एक ही दिन में चार बार तक आपत्तियां दर्ज की गईं। दूसरी ओर, इन मीडिया रिपोर्टों और आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान आयोग द्वारा लिए गए सभी निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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