सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के अपहरण मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के अपहरण और उनसे जुड़े अपराधों की जांच को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दाख़िल की गई है। इस याचिका में देशभर में एकसमान जांच प्रक्रिया लागू करने, समयबद्ध जांच और तेज़ सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है। यह याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दाख़िल की गई है। इसमें केंद्र और राज्यों को ऐसे मामलों के लिए मानक प्रश्नावली (questionnaires) और विशेष जांच प्रक्रियाएं तैयार करने का निर्देश देने की अपील की गई है। पिटीशन में यह भी कहा गया है कि बच्चों के अपहरण मामलों की जांच एसीपी (ACP) या एसएचओ (SHO) से नीचे के अधिकारी द्वारा न की जाए। साथ ही, सांसदों और विधायकों के लिए बनी विशेष अदालतों की तर्ज़ पर समर्पित अदालतें बनाई जाएं ताकि ऐसे मामलों का निपटारा एक साल के भीतर हो सके। याचिका में आगे यह मांग भी की गई है कि आरोपियों और उनके परिवार की चल-अचल संपत्तियों को ज़ब्त किया जाए और मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति तथा काले धन से जुड़े कानूनों को लागू किया जाए। इसके अलावा, अपहरण की सज़ाओं को लगातार (consecutive) चलाने का सुझाव दिया गया है ताकि अपराधियों में भय का माहौल बने। पिटीशनर ने आरोप लगाया है कि कई बार गुमशुदा बच्चों की शिकायतों को एफआईआर दर्ज करने के बजाय केवल “गुमशुदा रिपोर्ट” के रूप में दर्ज किया जाता है, जिससे जांच में देरी होती है और बच्चों की रिकवरी प्रभावित होती है। इस देरी के कारण वे तस्करी, यौन शोषण, मजबूरी में मज़दूरी और अवैध गोद लेने के ख़तरे में पड़ जाते हैं। याचिका में हाल की कई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बच्चों की तस्करी और अवैध गोद लेने में शामिल नेटवर्क राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैले हुए हैं। ऐसे में पुलिस बलों और विशेष एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। पिटीशनर ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, शिक्षा मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा लॉ कमीशन को इस मामले में पक्षकार बनाया है।
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