भाखड़ा बोर्ड में पंजाब की स्थायी सदस्यता खत्म, केंद्र के फैसले पर विवाद
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
केंद्र सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के बाद भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब और हरियाणा की स्थायी सदस्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे केंद्र और राज्य के बीच एक नया विवाद उभरने लगा है। यह अधिसूचना बैसाखी के दिन जारी की गई। पिछले चार वर्षों से भाखड़ा बोर्ड में पंजाब की स्थायी सदस्यता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार, बोर्ड में सदस्य (पावर) पंजाब से और सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से नियुक्त किए जाते रहे हैं। हालांकि, अब यह अनिवार्य नहीं रहेगा कि इन पदों पर नियुक्ति केवल इन दोनों राज्यों से ही हो। केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने 23 फरवरी 2022 को ‘भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड नियम-1974’ में संशोधन के लिए मसौदा अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत स्थायी प्रतिनिधित्व समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। उस समय पंजाब ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। इसके बाद सितंबर 2025 में संशोधित मसौदा जारी कर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए थे। पंजाब सरकार ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन अब केंद्र ने अंतिम रूप से ‘भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (संशोधन) नियम-2026’ लागू कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत पंजाब और हरियाणा को केवल बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति के समय प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन स्थायी सदस्यता नहीं दी जाएगी। केंद्र सरकार ने राजस्थान और हिमाचल प्रदेश को भी बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस फैसले पर पंजाब की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि यह कदम पंजाब को उसके मूल अधिकारों से वंचित करने और राज्य के जल संसाधनों को छीनने की साजिश है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर स्तर पर पंजाब के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी। राज्य के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी केंद्र से अधिसूचना वापस लेने की मांग की है। वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के जल संसाधनों पर कब्जा करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले बांधों से पंजाब पुलिस हटाई गई, फिर बोर्ड की चेयरमैनशिप छीनी गई और अब सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह पंजाब के हितों के खिलाफ है और केंद्र राज्य के पानी और बिजली पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि बोर्ड में किसी भी राज्य के अधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता खोलना पंजाब के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अधिकारियों को क्षेत्र की भौगोलिक और प्रशासनिक जानकारी बेहतर होती है, जो आपदा जैसी स्थितियों में अहम भूमिका निभाती है।
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