ईंधन पर विंडफॉल टैक्स में बदलाव: 16 अक्टूबर से लागू हुईं नई दरें, जानें क्या बदला
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
केंद्र सरकार ने देश से पेट्रोल और डीजल के निर्यात (Export) पर लगने वाली विंडफॉल टैक्स ड्यूटी में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आदेशों के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ा दिया है, जबकि डीजल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ी कटौती की गई है। ये नई दरें 16 अक्टूबर से प्रभावी हो गई हैं। आधिकारिक आदेश के अनुसार, पेट्रोल पर निर्यात ड्यूटी को ₹0.50 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹2.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। दूसरी ओर, डीजल निर्यातकों को राहत देते हुए इस पर लगने वाली ड्यूटी ₹16 प्रति लीटर से घटाकर ₹8.50 प्रति लीटर निर्धारित की गई है। हर 15 दिन में की जाती है दरों की समीक्षा वित्त मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात ड्यूटी की हर पखवाड़े (15 दिनों में) समीक्षा की जाती है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर इन दरों में संशोधन किया जाता है। पिछले कुछ महीनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी में कई बार बदलाव किए हैं। पिछले महीनों में किए गए बदलाव इससे पहले सितंबर महीने में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविऐशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात ड्यूटी घटाई थी। उस समय पेट्रोल पर निर्यात शुल्क घटाकर ₹0.50 प्रति लीटर कर दिया गया था। वहीं 1 सितंबर से डीजल की एक्सपोर्ट लेवी ₹3 से घटाकर ₹1 प्रति लीटर और डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स ₹24 से घटाकर ₹19 प्रति लीटर किया गया था। अगस्त महीने की बात करें तो सरकार ने पेट्रोल की एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹2.50 से बढ़ाकर ₹3.50 प्रति लीटर की थी। इसके अलावा डीजल पर कुल ड्यूटी ₹15.50 से बढ़ाकर ₹25.50 प्रति लीटर और एटीएफ (ATF) पर एक्सपोर्ट लेवी ₹14.50 से बढ़ाकर ₹22 प्रति लीटर कर दी गई थी। जुलाई 2022 में पहली बार लगा था विंडफॉल टैक्स उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2022 में पहली बार ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से रिफाइनरी कंपनियों को हुए असाधारण मुनाफे पर कर लगाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था। इसके बाद मार्च 2026 में अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद सरकार ने इस टैक्स को पुनः लागू किया था।
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