भूमि अधिग्रहण विवाद गहराया, किसानों ने प्रोजेक्ट कार्य पूरी तरह बंद कराया
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
पंजाब के बरनाला जिले में भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट का काम किसानों के विरोध के चलते पूरी तरह रुक गया है। ‘रोड संघर्ष कमेटी’ के बैनर तले 12 गांवों के किसानों ने अतिरिक्त मुआवजे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। संघर्ष कमेटी के उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह ने बताया कि यह आंदोलन विभिन्न किसान संगठनों के सहयोग से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन 12 गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है, वहां किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों की मुख्य मांग है कि उन्हें लुधियाना जिले की तर्ज पर 80 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, जबकि वर्तमान में उन्हें केवल 58 लाख रुपये प्रति एकड़ दिए जा रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक 80 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। कमेटी के अनुसार, बरनाला जिले में इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 500 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें गागेवाला, रामगढ़, विधाते, मूम और गेहल जैसे गांव शामिल हैं। किसानों का यह भी कहना है कि जिनकी जमीन परियोजना के कारण दो हिस्सों में विभाजित हो गई है, उन्हें 9 लाख रुपये प्रति एकड़ अलग से मुआवजा देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन यह राशि अब तक नहीं दी गई। यह विवाद वर्ष 2021 से लगातार जारी है। इस मुद्दे पर जिला प्रशासन का कहना है कि किसानों की मांग और निर्धारित मुआवजे में अंतर है। डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह के अनुसार, बरनाला में मुआवजे की गणना ‘लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट’ के तहत की गई है, जो किसानों की मांग से अलग है। उन्होंने बताया कि जिला राजस्व अधिकारी (DRO) को किसानों से बातचीत कर स्थिति को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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