परविंदर झोटा हत्याकांड: मांगें पूरी होने तक शव का नहीं होगा पोस्टमार्टम, परिवार और एक्शन कमेटी का कड़ा रुख
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के कत्ल के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन का गुरुवार को 10वां दिन है। इस बीच, परविंदर झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने वीरवार शाम स्पष्ट किया कि एक्शन कमेटी के साथ हुई बैठक में यह आम सहमति बनी है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगें नहीं मान लेती, परिवार पोस्टमार्टम के लिए अपनी सहमति नहीं देगा। परिवार का कहना है कि पहले उनकी माँगें पूरी की जाएं, उसके बाद ही पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार संबंधी अगला फैसला लिया जाएगा। इससे पहले दिन में, भीम सिंह ने मीडिया को जानकारी दी थी कि सिख पंथ की तरफ से परिवार को यह सलाह दी गई है कि वे पहले अपनी मांगें मनवाएं और उसके बाद ही पोस्टमार्टम के लिए रजामंदी दें। यह प्रदर्शन डिप्टी कमिश्नर की रिहाई के पास तिकोनी और सिविल अस्पताल (जहाँ झोटा का शव mortuary में रखा गया है) के बाहर लगातार जारी है। परिवार का कहना है कि वे खुद नहीं चाहते कि शव अस्पताल के शवगृह में ज्यादा समय तक रहे, लेकिन न्याय के लिए मांगों का पूरा होना अनिवार्य है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी अंतिम निर्णय 'संगत' की स्वीकृति और एक्शन कमेटी के माध्यम से ही लिया जाएगा। परिवार ने दोहराया है कि वे सीबीआई जांच में पूरा सहयोग देंगे। परिवार की मुख्य मांगें परिजनों और एक्शन कमेटी द्वारा सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के डीजीपी का इस्तीफा। पीजीआई (PGIMER) चंडीगढ़ के वरिष्ठ डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाना। कत्ल के साथ-साथ नशा तस्करों, पुलिस मुलाजिमों और राजनीतिक नुमाइंदों के बीच कथित गठजोड़ की सीबीआई जांच (जो कि पहले ही शुरू हो चुकी है)। परविंदर झोटा की आत्मकथा या उनकी याद में गाँव खियाला कलाँ में उनके नाम पर एक ट्रामा सेंटर की स्थापना और उनका बुत (मूर्ति) लगाना। मानसा के दो एसएचओ (SHO), एक डीएसपी (DSP) और ड्रग इंस्पेक्टर को बर्खास्त करना (गौरतलब है कि डीएसपी, ड्रग इंस्पेक्टर और एक एसएचओ को पहले ही निलंबित किया जा चुका है)। आरोपियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक अदालत में मुकदमा चलाकर कड़ी सजा दिलाना। गोलीबारी की घटना में घायल हुए चारों व्यक्तियों का इलाज किसी प्रमुख मेडिकल संस्थान में सरकारी खर्चे पर कराना और प्रत्येक घायल को 20 लाख रुपये का मुआवजा देना। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार के पैनल, पीड़ित परिवार और एक्शन कमेटी के बीच बातचीत का तीसरा दौर वीरवार सुबह होना था, लेकिन वह शाम तक नहीं हो सका। परिवार और कमेटी ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया था, क्योंकि बुधवार शाम को हुई बैठक समेत पिछले दोनों दौर की बातचीत पूरी तरह बेनतीजा रही थी।
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