अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए स्वदेश लौटा 49 सदस्यीय पाकिस्तानी सिख जत्था, गृह मंत्रालय ने दी विशेष मंजूरी

अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए स्वदेश लौटा 49 सदस्यीय पाकिस्तानी सिख जत्था, गृह मंत्रालय ने दी विशेष मंजूरी

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के विशेष मानवीय हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तान से भारत आया 49 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज अटारी-वाघा ज़मीनी मार्ग से अपने देश वापस लौट गया है। पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब से आए इन श्रद्धालुओं को अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करने की अनुमति दी गई। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अनुरोध पर गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया। इस विशेष छूट के कारण तीर्थयात्रियों का हवाई यात्रा (फ़्लाइट) का बड़ा वित्तीय खर्च बच गया, क्योंकि मूल योजना के अनुसार उन्हें हवाई मार्ग से वापस पाकिस्तान लौटना था। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 1 मई 2025 से अटारी-वाघा सीमा आम और कम अवधि के यात्रियों के लिए बंद है। वर्तमान में केवल '1974 इंडो-पाक प्रोटोकॉल ऑन विजिट्स टू रिलीजियस श्राइन्स' के तहत निर्धारित धार्मिक अवसरों पर ही संगठित यात्राओं की अनुमति है। DSGMC के मुख्य सलाहकार (एनआरआई मामले) परमजीत सिंह चंडोक ने श्रद्धालुओं को ज़मीनी मार्ग से भेजने के लिए आवश्यक मंजूरी और लॉजिस्टिक सहायता प्राप्त करने हेतु गृह मंत्रालय से संपर्क साधा था। यह जत्था मूल रूप से 8 अक्टूबर को लाहौर-ताशकंद-नई दिल्ली रूट के जरिए भारत पहुंचा था। 6 नवंबर को वीजा की अवधि समाप्त होने से पहले उनकी हवाई मार्ग से वापसी तय की गई थी। दोनों देशों की सरकारों का आभार व्यक्त करते हुए जत्थे के नेता पपिंदर सिंह ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद अलग हुए पवित्र धार्मिक स्थलों के दर्शन-दीदार के लिए दुनिया भर के सिख श्रद्धालु हमेशा लालायित रहते हैं। उन्होंने आगे बताया कि 10 अक्टूबर को कपाट बंद होने से ठीक दो दिन पहले समूह के लगभग 40 सदस्यों ने उत्तराखंड स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन किए। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने श्री हरिमंदिर साहिब में गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व समारोह में भी हिस्सा लिया, जो उनके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को शुरुआत में कुछ कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा था। दिल्ली, अमृतसर, आनंदपुर साहिब और हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए कुल 104 वीजा जारी किए गए थे। हालांकि, सितंबर में फैसलाबाद से बच्चों सहित 94 श्रद्धालुओं के समूह को यात्रा दस्तावेजों और रिटर्न टिकट से जुड़े मुद्दों के कारण विमान में चढ़ने से रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्हें नई टिकटें खरीदनी पड़ी थीं।