सुनील जाखड़ ने पंजाब में 'आदर्श आचार संहिता' लागू करने की मांग की; कहा- सरकार ने खुद मान ली है कानून व्यवस्था की विफलता
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राज्य के राज्यपाल को पत्र लिखकर पंजाब में जल्द से जल्द 'आदर्श आचार संहिता' (Model Code of Conduct) लागू करने की मांग की है। जाखड़ का तर्क है कि खुद भगवंत मान सरकार ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। लोक भवन में राज्यपाल को भेजे गए अपने पत्र में जाखड़ ने अबोहर में आयोजित होने वाली सालाना एंटी-ड्रग (नशा विरोधी) मैराथन की अनुमति प्रशासन द्वारा अस्वीकार किए जाने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से लिखित रूप में यह कारण दिया गया है कि राज्य में अनुकूल माहौल नहीं है और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। जाखड़ के अनुसार, यह मैराथन अबोहर में पिछले कई वर्षों से लगातार आयोजित की जाती रही है, जिसमें हजारों युवा उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं। उन्होंने अपनी इस मांग के समर्थन में प्रशासनिक पत्र की कॉपी भी संलग्न की है। सुनील जाखड़ ने कहा कि हालांकि वे इस सरकार और उसकी नीतियों के विरोधी रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब वे सरकार द्वारा खुद कबूल की गई इस "कड़वी सच्चाई" से सहमत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में आज कोई भी सुरक्षित नहीं है और नशों के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाया जा रहा है। उन्होंने अमृतसर, तरनतारन, खेमकरण, गुरदासपुर, श्री हरगोबिंदपुर, मानसा, अबोहर, संगरूर और लुधियाना जैसे विभिन्न क्षेत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस नशों के कारण जान गंवाने वाले बच्चों के शवों को उनके परिजनों से जबरन छीन रही है और नशों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को पुलिस उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। जाखड़ ने इस स्थिति के लिए आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की सोची-समझी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने 'आप' के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि पार्टी चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडा अपनाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने चहेते और आज्ञाकारी अधिकारियों को अहम पदों पर तैनात किया है, जबकि अपराधियों और गैंगस्टरों को संरक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जेलों से आपराधिक गतिविधियों के संचालन, त्सकरों को पेरोल पर रिहा करने और भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री के परिवार का नाम आने का भी गंभीर आरोप लगाया। पत्र के अंत में सुनील जाखड़ ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे माहौल में एक सीमावर्ती राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि इस सरकार को और समय दिया गया, तो यह नागरिकों के मौलिक और मानवाधिकारों का हनन करने के समान होगा। इसलिए, राज्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तुरंत चुनावी आचार संहिता लागू की जानी चाहिए।
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