फोर्टिफाइड चावल पर रोक से पंजाब में खाली होंगे गोदाम, मिल मालिकों को राहत
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
केंद्र सरकार ने फोर्टिफाइड चावल की सप्लाई को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब सामान्य चावल को केंद्रीय पूल में भेजने का रास्ता खुल गया है। इस कदम से पंजाब के करीब पांच हजार चावल मिल मालिकों को बड़ी राहत मिली है और राज्य में नए अनाज के भंडारण के लिए जगह बनने की संभावना बढ़ी है। इस समय देश के गोदामों में पिछले वर्षों के फोर्टिफाइड चावल का बड़ा भंडार मौजूद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंजाब के चावल मिल मालिकों को वर्ष 2025-26 के दौरान खरीदे गए धान की मिलिंग के बाद 102 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्रीय पूल में देना है। इस कुल मात्रा में से 82 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल देने की योजना थी। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने राज्यों को जारी एक पत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकने की जानकारी दी है। फिलहाल पंजाब में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के तीन वर्षों का फोर्टिफाइड चावल बड़ी मात्रा में गोदामों में जमा है, जिससे नई फसल के भंडारण को लेकर समस्या उत्पन्न हो रही थी। पंजाब अब तक 102 लाख मीट्रिक टन में से 40 लाख मीट्रिक टन सामान्य चावल केंद्र को दे चुका है, जबकि 62 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति बाकी थी। अब केंद्र ने अस्थायी तौर पर फोर्टिफाइड चावल की जगह सामान्य चावल लेने का निर्णय लिया है। यह फैसला चावल मिलरों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि वे पिछले तीन महीनों से गुणवत्ता मानकों को सख्त करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से असहमति जता रहे थे। फोर्टिफाइड चावल पर लागू दोहरे परीक्षण प्रोटोकॉल के कारण मिलरों को कई तकनीकी और संचालन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 मार्च के बाद पोर्टल पर किसी भी नए फोर्टिफाइड चावल बैच की एंट्री स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही, वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बकाया चावल के लिए मिलरों को विकल्प दिया गया है कि वे फोर्टिफाइड या गैर-फोर्टिफाइड चावल में से किसी भी रूप में आपूर्ति कर सकते हैं। वर्तमान में पंजाब से लगभग 70 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी अभी बाकी है। इसके लिए हर महीने कम से कम 20 लाख मीट्रिक टन चावल की आवाजाही आवश्यक है, जबकि पिछले महीनों में यह मात्रा 4 लाख मीट्रिक टन से भी कम रही है।
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