पंजाब में अवैध माइनिंग का बड़ा मामला: सील होने के बावजूद धड़ल्ले से चलते रहे क्रशर, पुलिस के हाथ अब भी खाली

पंजाब में अवैध माइनिंग का बड़ा मामला: सील होने के बावजूद धड़ल्ले से चलते रहे क्रशर, पुलिस के हाथ अब भी खाली

पंजाब के तलवाड़ा क्षेत्र में अवैध खनन और बिना किसी सरकारी अनुमति के संचालित हो रहे स्टोन क्रशरों का एक बड़ा मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बावजूद ये क्रशर नियमों को ताक पर रखकर लगातार चलते रहे। पोंग बांध के पास पंजाब क्षेत्र में स्थापित एक क्रशर लंबे समय तक पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा के विवाद की आड़ में फायदा उठाता रहा और अधिकारियों द्वारा सील किए जाने के बावजूद चालू रहा। इस विवादित क्रशर को पहली बार जुलाई 2022 में और दूसरी बार सितंबर 2024 में मामले दर्ज कर सील किया गया था। हालांकि, सील किए गए क्रशर को दोबारा अवैध रूप से चालू करवाने के मामले में तलवाड़ा पुलिस अभी तक अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने से आगे नहीं बढ़ पाई है। पोंग बांध के मुहाने पर पंजाब की सीमा में स्थित इस क्रशर के खिलाफ चांगड़वां के रहने वाले स्वरूप सिंह ने अप्रैल 2020 से ही शिकायतें दर्ज करवानी शुरू कर दी थीं, लेकिन लंबे समय तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान लगाया गया यह क्रशर वन संरक्षण अधिनियम (फॉरेस्ट एक्ट) की धारा-4 के दायरे में आने वाले क्षेत्र में स्थित है और इसे किसी भी प्रकार की सरकारी मंजूरी नहीं मिली थी। बिना मंजूरी के वर्तमान सरकार में भी जारी रहा संचालन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह क्रशर बिना किसी वैध अनुमति के मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भी अवैध रूप से संचालित होता रहा। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस क्रशर के कारण धारा-4 के अंतर्गत आने वाली जमीन पर करीब 2300 पेड़ों का नुकसान हुआ था, जबकि मौके पर पहुंचे वन विभाग के रेंज अधिकारी ने केवल 285 पेड़ों के नुकसान की ही पुष्टि की थी। इसी तरह का एक अन्य मामला भी सामने आया, जिसमें दसुआ के निवासी अमित डडवाल ने शिकायत की थी कि क्रशर मालिक द्वारा उनकी स्वामित्व वाली करीब 379 कनाल भूमि को जबरन खोद डाला गया है। उन्होंने तत्कालीन एसडीएम को इसकी शिकायत दी थी, लेकिन वहां भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शुरुआत में अधिकारी यह कहकर गुमराह करते रहे कि यह क्रशर हिमाचल प्रदेश की सीमा में स्थित है, लेकिन पंजाब राजस्व विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट ने सारी सच्चाई उजागर कर दी। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यह क्रशर पंजाब के तलवाड़ा कस्बे के हदबस्त नंबर 640 के खसरा नंबर 1 में स्थित पाया गया था। इस मामले में तलवाड़ा थाने में दो व्यक्तियों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था, पर इसके बावजूद सील होने के बाद भी क्रशर का संचालन रुक-रुक कर जारी रहा। सीबीआई जांच और नुकसान के मुआवजे की मांग ऑल इंडिया किसान सभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष गुरनेक सिंह भज्जल ने इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि तलवाड़ा क्षेत्र में हुए अवैध खनन में प्रशासनिक, पुलिस, वन और खनन विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत की है। उन्होंने मांग की है कि पिछले करीब 10 वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में तैनात रहे सभी अधिकारियों की संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। उन्होंने सीबीआई से यह भी मांग की है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट में किसानों की जमीनों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा दिलाने हेतु अदालत से सिफारिश करे। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे खुलकर सामने आएं और सीबीआई अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखें।