पंजाब विधानसभा में पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव सदन में पारित कराया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और भाजपा के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। शिरोमणि अकाली दल की विधायक गुनीव कौर मजीठिया भी अनुपस्थित रहीं। प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायकों ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित सरकारी कार्रवाई की निंदा की गई। सदन ने मांग की कि छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी गैर-जरूरी आपराधिक मामले तत्काल वापस लिए जाएं तथा घायल छात्रों को उचित उपचार, पुनर्वास और आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। सदन ने यह भी सिफारिश की कि प्रस्ताव की प्रतियां केंद्रीय गृह मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी जाएं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि "पेपर खरीद" का मामला है, जिसने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है और युवाओं का विश्वास तोड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा सरकार आई है, तब से अब तक 93 पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं और इनमें से अधिकांश भाजपा शासित राज्यों में हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीट परीक्षा से निराश होकर 22 अभ्यर्थियों ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने इन सभी पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। भगवंत मान ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके कारण विदेशों में भी भारतीय डिग्रियों की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पाठ्यक्रम में बदलाव कर इतिहास को बदलने का प्रयास कर रही है, लेकिन पंजाब में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पंजाब में पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान पेपर लीक की एक भी घटना सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान नकल के कुछ मामले जरूर सामने आए थे, जिन पर सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने के बजाय उन्होंने सदन से दूर रहना उचित समझा। शिक्षा मंत्री और अन्य विधायकों ने भी रखे अपने विचार बहस के दौरान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए छात्र भारत के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत के हित में आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि असहमति को देश विरोधी गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए। कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह, विधायक गुरप्रीत सिंह बनांवाली और अमृतपाल सुखानंद सहित कई सदस्यों ने भी बहस में भाग लिया। शिरोमणि अकाली दल के बागी विधायक मनप्रीत सिंह इयाली, जो अब अकाली दल (वारिस पंजाब) से जुड़े हैं, ने प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि उन्होंने पंजाब में प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों और मनरेगा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया।
Posted By: Daily Suraj Bureau