फीस न भर पाने पर स्कूल से निकाले गए चार भाई-बहन, हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकले
फरीदाबाद से करीब 75 किलोमीटर दूर कोसीकलां कस्बे के चार भाई-बहनों की कांवड़ यात्रा इन दिनों चर्चा में है। स्कूल की फीस नहीं भर पाने के कारण स्कूल से निकाले जाने के बाद इन बच्चों ने हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की। उनके पैरों में छाले हैं और वे कंधों पर गंगाजल से भरी कांवड़ लेकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। बच्चों की प्रार्थना है कि भगवान शिव उनके माता-पिता की आर्थिक मदद करें, ताकि वे दोबारा स्कूल जा सकें। 30 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा इन चार बच्चों में 7 वर्षीय प्रेरणा, जो तीसरी कक्षा में पढ़ती है, शिवम, जो सातवीं कक्षा का छात्र है, नौवीं कक्षा में पढ़ने वाला उनका एक अन्य भाई और बड़ी बहन साधना शामिल हैं, जो 11वीं कक्षा में पढ़ती है। परिवार के अनुसार, चारों ने गंगा से पवित्र जल एकत्र करने के बाद 30 जुलाई को हरिद्वार से पैदल कांवड़ यात्रा शुरू की थी। माता-पिता दोनों दिव्यांग, परिवार आर्थिक संकट में परिवार के अनुसार, बच्चों के माता-पिता सुनीता और भरत सिंह दोनों दिव्यांग हैं और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। परिवार कई महीनों से बच्चों के निजी स्कूल की फीस जमा नहीं कर पा रहा था। इसके बाद चारों भाई-बहनों को स्कूल से निकाल दिया गया। रिश्तेदारों से मदद नहीं मिली तो लिया यात्रा का फैसला परिवार के मुताबिक, रिश्तेदारों और दोस्तों से भी मदद नहीं मिलने के बाद बच्चों ने यह तीर्थ यात्रा करने का निर्णय लिया। उन्हें उम्मीद है कि उनकी प्रार्थना भगवान शिव तक पहुंचेगी और कोई चमत्कार होगा, जिससे परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर हो सकेंगी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानी चारों भाई-बहनों की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। उनकी कांवड़ यात्रा से जुड़े वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में बड़ी बहन साधना बताती हैं कि माता-पिता की दिव्यांगता के कारण परिवार स्कूल की फीस नहीं भर सका। वीडियो में साधना कहती हैं कि फिलहाल परिवार श्रद्धा और किसी चमत्कार की उम्मीद पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि वे कांवड़ यात्रा कर रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं कि उन्हें उनके स्कूल बैग वापस मिल जाएं। बच्चों की स्थिति ने प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल बच्चों की आस्था ने कई लोगों को प्रभावित किया है, लेकिन इस घटना ने परिवार की मदद के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। चारों भाई-बहनों की कहानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की चुनौतियों को भी सामने लाती है। ऐसे परिवारों को बुनियादी अवसरों और सेवाओं तक पहुंच के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
Posted By: Daily Suraj Bureau