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गंभीर अपराध में 30 दिन जेल तो पद जाएगा! सरकार मानसून सत्र में ला सकती है नया विधेयक

02 Jul, 2026 02:03 PM

केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में एक महत्वपूर्ण विधेयक को दोबारा पेश कर सकती है, जिसके तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री किसी गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तारी के बाद लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। सूत्रों के अनुसार, 130वें संविधान संशोधन विधेयक, 2025 की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) इस प्रावधान को हटाने के पक्ष में नहीं है। समिति द्वारा 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि समिति की रिपोर्ट में उस विवादित प्रावधान को बनाए रखा जा सकता है, जिसके अनुसार गंभीर अपराध के मामले में 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य मंत्रियों को स्वतः अपने पद से हटाया जा सकेगा। हालांकि, समिति कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ सुरक्षा प्रावधान जोड़ने पर भी विचार कर रही है, ताकि इसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए न हो सके। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, यह नियम केवल उन मामलों पर लागू होगा जिनमें संबंधित अपराध के लिए पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। यदि ऐसे मामले में कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति या राज्यपाल के आदेश से लागू की जा सकती है अथवा हिरासत के 31वें दिन से स्वतः प्रभावी हो जाएगी। कम सजा वाले अपराध इस प्रावधान के दायरे में शामिल नहीं होंगे। इस विधेयक की जांच भारतीय जनता पार्टी की सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति कर रही है। समिति की रिपोर्ट 17 जुलाई तक तैयार होने की संभावना है, जिसके बाद इसे संसद के मानसून सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले वर्ष अगस्त में यह विधेयक संसद में पेश किया था। इसके परीक्षण के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया था। कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने समिति की कार्यवाही का बहिष्कार किया था। विपक्ष का आरोप था कि सत्तारूढ़ दल उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं करेगा और समिति का उपयोग केवल विधेयक को औपचारिक मंजूरी दिलाने के लिए किया जाएगा।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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