अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी बहाल की, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही घटी
अमेरिका ने लगभग 50,000 सैनिकों, युद्धपोतों और सैन्य विमानों के समर्थन के साथ बुधवार को ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी दोबारा शुरू कर दी है। पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से निकलने वाले समुद्री यातायात पर यह प्रतिबंध 14 जुलाई को अमेरिकी ईस्टर्न समयानुसार शाम 4 बजे लागू हुआ, जो भारत में 15 जुलाई को रात 1:30 बजे के बराबर है। इस घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी तेजी देखने को मिली। मंगलवार रात तक ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 81.54 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो मध्य जून के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनी Kpler के अनुसार, 10 जुलाई से 12 जुलाई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग 52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। नाकाबंदी पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया मंच X पर जारी एक पोस्ट में कहा कि वर्तमान में पूरे मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में अमेरिकी नौसेना के 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान सक्रिय हैं तथा अमेरिकी सेनाएं पूरी तरह सतर्क, सक्षम और कार्रवाई के लिए तैयार हैं। इससे एक दिन पहले सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी थी कि इस समय मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ये सैनिक क्षेत्र के विभिन्न देशों में स्थित अमेरिका के 19 सैन्य ठिकानों के अलावा करीब 20 अमेरिकी युद्धपोतों पर भी तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान जारी कर कहा कि पिछले सात दिनों के दौरान ईरान ने कथित तौर पर पूरे क्षेत्र में नागरिकों को निशाना बनाया और सात वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया। उनके अनुसार, इन घटनाओं में लगभग एक दर्जन नागरिक चालक दल के सदस्य मारे गए, लापता हुए या घायल हुए हैं। एडमिरल कूपर ने यह भी कहा कि ईरानी बलों ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ईरान को इस आक्रामक रुख के लिए जिम्मेदार मानती है, जिससे निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ रही है। वहीं, मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान को छोड़कर अन्य सभी जहाजों की आवाजाही के लिए खुला रहेगा। यह समुद्री नाकाबंदी ऐसे समय में लागू की गई है जब 7 जुलाई से अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं। इसके चलते 17 जून को दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते (MoU) का व्यावहारिक रूप से अंत हो गया है। अमेरिका ने दावा किया कि उसने मंगलवार को पांच घंटे का एक सैन्य अभियान चलाया, जिसके तहत बुशेहर, चाबहार, जस्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास सहित ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, ताकि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरानी क्षमता को कमजोर किया जा सके। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों और हितों के खिलाफ व्यापक जवाबी अभियान शुरू कर दिया है।
Posted By: Daily Suraj Bureau