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चुनाव आयोग में मतभेद का दावा, 10 महीनों में दो आयुक्तों ने 14 बार दर्ज कराई आपत्ति

23 Sep, 2026 03:47 PM

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का जिक्र किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने CEC पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है तथा कुछ नेताओं ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग की मांग भी की है। विवाद की शुरुआत एक रिपोर्ट से हुई, जिसमें कहा गया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां ऐसे फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिन्हें दोनों आयुक्तों ने अपने संज्ञान या जानकारी के बिना जारी किए जाने का दावा किया। इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अपील, चुनावी डेटा की सुरक्षा और उसके प्रबंधन तथा फॉर्म-6 में बदलाव जैसे मुद्दों से था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी डेटाबेस तक पहुंच के केंद्रीकरण और कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए थे। विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यदि रिपोर्ट में बताए गए तथ्यों के अनुसार नियमों का पालन किए बिना या बहुमत के बिना फैसले लिए गए हैं, तो ऐसे फैसलों की वैधता पर सवाल उठता है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी ज्ञानेश कुमार से विवादित फैसलों के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एक व्यक्ति के नियंत्रण में आ गया है। उन्होंने कहा कि सांसदों ने 24 अप्रैल 2026 को संविधान के प्रावधानों के तहत CEC को हटाने के लिए नोटिस दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग भी की। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी CEC के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। वहीं, टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि 60 से अधिक विपक्षी सांसद पहले ही ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति को सौंप चुके हैं और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले की जांच और SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने दावों को किया खारिज वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने आंतरिक मतभेद और ‘एक व्यक्ति की तानाशाही’ से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, किसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान अलग-अलग राय या सवाल उठाना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, तीन सदस्यीय आयोग में सभी चुनाव आयुक्तों की समान भूमिका है। यदि किसी मुद्दे पर मतभेद होता है तो नियमों के अनुसार बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम निर्णय से असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस पूरे विवाद का केंद्र विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के साथ-साथ मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, चुनावी डेटाबेस के प्रबंधन और आयोग के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था बनी हुई है। फिलहाल विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के सर्वसम्मति से फैसले लेने के दावे के बीच यह मामला राजनीतिक और संस्थागत बहस का विषय बना हुआ है। SEO Title: CEC ज्ञानेश कुमार पर ‘एक व्यक्ति की तानाशाही’ के आरोप, विपक्ष ने की हटाने की मांग SEO Description: चुनाव आयोग में कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा। रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की, जबकि चुनाव आयोग ने सभी फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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