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पंजाब में दिवाली से ठीक पहले बढ़े पराली जलाने के मामले; धान की 88 फीसदी कटाई पूरी

07 Nov, 2026 09:53 AM

दिवाली के त्योहारी सीजन से ठीक पहले उत्तर भारत में पराली जलाने के मामलों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, उत्तर भारत में पराली जलाने के कुल मामलों में से लगभग 50 प्रतिशत मामले अकेले पंजाब राज्य से सामने आ रहे हैं। हालांकि पंजाब ने हाल के वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रयास किए हैं और आंकड़ों में सुधार भी दिखा है, लेकिन इसके बावजूद अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में पंजाब आज भी इस सूची में पहले स्थान पर बना हुआ है। हाल ही में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले पराली जलाने के दैनिक मामलों में करीब साढ़े चार गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में अब तक पराली जलाने के कुल 5,637 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से सबसे अधिक 2,787 मामले अकेले पंजाब से हैं। इसकी तुलना में हरियाणा में 80, उत्तर प्रदेश में 456, राजस्थान में 1,039, मध्य प्रदेश में 1,081, उत्तराखंड में 192 और दिल्ली में केवल 2 मामले दर्ज किए गए हैं। बीते दिन पंजाब में एक ही दिन में 440 नए मामले रिपोर्ट हुए, जबकि हरियाणा में यह संख्या महज डेढ़ दर्जन के आसपास रही। पंजाब में इस धान सीजन के दौरान अब तक पराली जलाने के कुल 2,787 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल के 2,933 के आंकड़े के बेहद करीब है। राज्य में अब तक धान की कटाई का 88 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस बार बेमौसम हुई बारिश के कारण फसलों की कटाई के काम में कुछ रुकावट आई थी, जिससे यह प्रक्रिया थोड़ी पिछड़ गई। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए 'आप' सरकार किसानों पर सख्ती करने से बच रही है ताकि उनकी नाराजगी का सामना न करना पड़े। हालाँकि, राज्य के लिए राहत की बात यह है कि करीब आधा दर्जन जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में पराली जलाने के मामलों में गिरावट आई है। संगरूर, मोहाली, मानसा, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और अमृतसर जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के नेता काका सिंह कोटड़ा ने बताया कि मालवा क्षेत्र के किसानों ने अपने स्तर पर पराली प्रबंधन के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं, जिससे किसान अब पराली जलाने से परहेज कर रहे हैं। जिलों के अनुसार आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में तरनतारन जिला पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे है, जहां अब तक 586 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद फिरोजपुर 361 मामलों के साथ दूसरे और संगरूर 240 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं सबसे कम मामले पठानकोट (केवल 1 केस) और रोपड़ (4 केस) से सामने आए हैं।

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