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राघव चड्ढा मानहानि मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 पोस्ट हटाने का दिया आदेश, व्यापक राहत से इनकार

01 Jul, 2026 04:31 PM

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को कथित मानहानिकारक ऑनलाइन सामग्री हटाने और उनके व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्यापक (ब्लैंकेट) अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने चड्ढा द्वारा चिन्हित की गई पांच विशेष सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका में शामिल बाकी सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत नहीं होती। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पांच दस्तावेजों या पोस्टों को हटाने का आदेश दिया गया है, जबकि शेष सामग्री के संबंध में किसी व्यापक अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है। यह आदेश राघव चड्ढा द्वारा दायर उस मुकदमे पर आया, जिसमें उन्होंने इस वर्ष आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित एआई-जनरेटेड डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, सिंथेटिक वॉयस क्लोनिंग, मॉर्फ्ड तस्वीरों, फर्जी भाषणों और अन्य भ्रामक डिजिटल सामग्री पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में चड्ढा ने दावा किया था कि कई पोस्ट उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली हैं। इनमें ऐसी मॉर्फ्ड तस्वीरें भी शामिल थीं, जिनमें उन्हें साड़ी पहने हुए दिखाया गया था, जबकि एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन पर पैसे लुटाते हुए दर्शाया गया था। उनका कहना था कि इन पोस्टों के जरिए यह गलत संदेश दिया गया कि उन्होंने भाजपा में शामिल होने के लिए धन लिया है। इससे पहले 21 मई को अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रारंभिक रूप से कहा था कि विवादित सामग्री मुख्य रूप से राजनीतिक आलोचना से जुड़ी प्रतीत होती है और इसे व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जा सकता। जस्टिस प्रसाद ने टिप्पणी की थी कि राजनीतिक निर्णयों की आलोचना लंबे समय से लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा रही है और इसके संदर्भ में उन्होंने आर.के. लक्ष्मण के राजनीतिक कार्टूनों का भी उल्लेख किया था। अदालत ने यह भी कहा था कि सोशल मीडिया ने राजनीतिक आलोचना की पहुंच अवश्य बढ़ाई है, लेकिन केवल इसी आधार पर इसे व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मानहानि के दावे और व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मामलों के बीच कानूनी अंतर है तथा चड्ढा द्वारा उठाए गए अधिकांश मुद्दे मानहानि के दायरे में अधिक आते हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय राजनीतिक नेताओं को आलोचना के प्रति कितनी सहनशीलता रखनी चाहिए। जस्टिस प्रसाद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित सामग्री एक राजनीतिक निर्णय पर टिप्पणी जैसी प्रतीत होती है और पूछा, "एक राजनीतिक नेता के रूप में, क्या आप इतने संवेदनशील हो सकते हैं?" अदालत ने यह भी संकेत दिया था कि यदि आवश्यक हुआ तो ऑनलाइन सामग्री के कथित निर्माताओं की पहचान के लिए एक एमिकस क्यूरी नियुक्त करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, चड्ढा के वकील ने पहले अंतरिम राहत संबंधी याचिका पर निर्णय देने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पांच विशेष पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, जबकि बाकी सामग्री के संबंध में व्यापक अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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