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वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा: एक ही सौर मंडल में साथ बने होने के बावजूद अलग-अलग प्रक्रियाओं से बने पृथ्वी और मार्स

02 Oct, 2026 04:09 PM

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी और मंगल ग्रह के बनने के शुरुआती चरणों का नए सिरे से पता लगाया है। नई रिसर्च के अनुसार, भले ही ये दोनों ग्रह गैस और धूल के एक ही घूमते हुए बादल में पैदा हुए थे, जिससे अंततः हमारे सौर मंडल का निर्माण हुआ, लेकिन इनके बनने के तरीके काफी अलग थे। कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के ग्लोब इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता एंद्रेर्स जोहान्सन ने बताया कि यह सबसे हैरान करने वाला परिणाम है, क्योंकि एक ही सौर मंडल में साथ-साथ बने दो ग्रहों से एक जैसी बनावट के इतिहास की उम्मीद की जाती है। इस अध्ययन के सह-मुख्य शोधकर्ता हियांग वांग ने जानकारी दी कि पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा दो युवा ग्रहों या प्रोटोप्लैनेट से आया है, जिन्होंने पत्थरों को आपस में एकत्र करके बड़ा रूप लिया। इसके विपरीत, प्लैनेटेसिमल ने इसमें 25 प्रतिशत तक योगदान दिया। वहीं दूसरी ओर, मंगल ग्रह का हिसाब इसके बिल्कुल उलट है; मार्स के द्रव्यमान का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा प्लैनेटेसिमल से आता है और बाकी का एक-चौथाई हिस्सा पत्थरों के जमा होने से बना है। 'नेचर एस्ट्रोनॉमी' पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन 4.5 अरब साल पहले ग्रहों की उत्पत्ति की जांच करने के लिए दोनों ग्रहों की ऊपरी सतह और आंतरिक परत में मौजूद खास तत्वों का सूक्ष्म विश्लेषण करता है। वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि ग्रह या तो विशाल अंतरिक्ष चट्टानों के आपस में टकराने से बनते हैं या फिर बड़ी चट्टानों द्वारा छोटे कणों को अपनी ओर आकर्षित करके इकट्ठा करने की प्रक्रिया के जरिए आकार लेते हैं। यह नए परिणाम इस हाइब्रिड मॉडल का पूरी तरह समर्थन करते हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान सोडियम, जिंक और पोटैशियम जैसे वाष्पशील (अस्थिर) तत्वों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया, क्योंकि इनकी मौजूदगी या गैर-मौजूदगी एक रासायनिक फिंगरप्रिंट के रूप में कार्य करती है। आधुनिक कंप्यूटर मॉडलों की मदद से यह पता लगाया गया है कि अरबों साल पहले गायब हो चुके शुरुआती सबूतों के बावजूद, पृथ्वी और मंगल की परतों की बनावट आज भी उनके गठन की प्रक्रिया की एक अनोखी छाप के रूप में सुरक्षित है।

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