रिश्वत मामले में फरार रीडर ओपी राणा की मुश्किलें बढ़ीं, हाईकोर्ट में 29 मई को सुनवाई
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
लाख रुपये के रिश्वत कांड में फरार चल रहे विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख के रीडर ओपी राणा के खिलाफ सीबीआई ने भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत ने फिलहाल आरोपी राणा के खिलाफ 6 जून तक दोबारा गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, सीबीआई अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद ओपी राणा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। इस मामले में अब 29 मई को सुनवाई होनी है। सीबीआई अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लंबित होने के कारण फिलहाल आरोपी को भगोड़ा घोषित नहीं किया गया, लेकिन उसके खिलाफ नए गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी का व्यवहार गिरफ्तारी से बचने वाला प्रतीत होता है। सीबीआई ने बीएनएसएस की धारा 84 के तहत अदालत में आवेदन दाखिल कर ओपी राणा को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दलील दी कि यदि कोई स्टे आदेश नहीं है, तो हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। गौरतलब है कि सीबीआई ने 11 मई को मलोट निवासी विकास गोयल, राघव गोयल और उनके ड्राइवर अंकित वधवा को एक टैक्स अधिकारी से 13 लाख रुपये नकद और एक सैमसंग मोबाइल रिश्वत के रूप में लेते हुए गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि मलोट के पिता-पुत्र विजिलेंस के कथित बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे और इस पूरे मामले में विजिलेंस प्रमुख के रीडर ओपी राणा का नाम भी शामिल था। सीबीआई टीम ने पीछा कर विकास गोयल और राघव गोयल को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि ओपी राणा मौके से फरार होने में सफल रहा। जांच एजेंसी ने अदालत में तीन सीलबंद लिफाफे भी जमा कराए हैं, जिनमें तलाशी से संबंधित सामग्री होने की बात कही गई है। इसी बीच, चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत ने रिश्वत कांड में गिरफ्तार विकास गोयल, राघव गोयल और अंकित वधवा की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए और बढ़ा दी है। अदालत ने सीबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 6 जून को तय की है। अदालत ने माना कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखना फिलहाल उचित है।
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