पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम समुद्री मार्ग खोलने को अंतरराष्ट्रीय बैठक

पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम समुद्री मार्ग खोलने को अंतरराष्ट्रीय बैठक

अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण बंद हुए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इसी उद्देश्य से गुरुवार को लगभग 30 से अधिक देश एक वर्चुअल बैठक में भाग लेंगे, जिसमें इस जलमार्ग को फिर से चालू करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा कि यह बैठक विदेश मंत्री Yvette Cooper की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी। बैठक में समुद्री यातायात की स्वतंत्रता बहाल करने, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए व्यावहारिक कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों पर विचार किया जाएगा। ईरानी हमलों और अन्य सुरक्षा खतरों के कारण फारस की खाड़ी को दुनिया के अन्य समुद्रों से जोड़ने वाले इस अहम जलमार्ग में लगभग पूरी तरह से आवाजाही रुक गई है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने सहयोगी देशों से कहा है कि वे “अपना तेल खुद हासिल करें।” इस बीच, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और संयुक्त अरब अमीरात सहित कुल 35 देशों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बयान में ईरान से जलमार्ग को अवरुद्ध करने की कोशिशें बंद करने की मांग की गई है और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों का संकल्प लिया गया है। यह गठजोड़ आंशिक रूप से NATO से जुड़े सुरक्षा मुद्दों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा नाटो से अलग होने के संकेतों के बाद यूरोपीय देशों पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का दबाव बढ़ा है। ऐसे में यह पहल यूरोप की बढ़ती सामरिक सक्रियता को भी दर्शाती है।