पंजाब में नवजातों के लिए वरदान बनी योजना, तीन महीनों में 6,000 से अधिक बच्चों का उपचार
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत पंजाब में नवजात बच्चों और माताओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ रहे हैं। योजना की शुरुआत के समय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा था कि लोगों को इलाज की चिंता करनी चाहिए, बिल की नहीं, क्योंकि इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। यह बात अब कई परिवारों के लिए वास्तविक राहत साबित हो रही है। अबराह (अबोहर) में रहने वाले रशप्रीत कौर और भरत कुमार की चार महीने की बेटी दिलजोत इसका एक उदाहरण है। दिलजोत को गंभीर संक्रमण और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) की बीमारी का पता चला, जो जन्म से पहले ही विकसित हो जाती है। बच्ची को इलाज के लिए बठिंडा ले जाया गया, जहां उसे विशेष चिकित्सा देखभाल और 24 घंटे निगरानी में रखा गया। भरत कुमार, जो एक छोटा सैलून चलाते हैं, ने बताया कि उनकी बेटी का इलाज दो अलग-अलग अस्पतालों में हुआ और स्वास्थ्य कार्ड के तहत कुल 2.77 लाख रुपये का खर्च पूरी तरह कवर किया गया। इस दौरान परिवार को किसी प्रकार की आर्थिक चिंता का सामना नहीं करना पड़ा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में यह योजना सुनिश्चित करती है कि किसी भी परिवार को स्वास्थ्य और आर्थिक कठिनाइयों में से किसी एक को चुनना न पड़े। योजना के तहत प्रत्येक मां और नवजात को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध है। यह सुविधा सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में जन्म के शुरुआती घंटों से ही लागू होती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि परिवार समय पर जांच और इलाज करवा सकें। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में 6,000 से अधिक नवजात बच्चों का इलाज इस योजना के तहत किया गया है। यह योजना कम वजन, समय से पहले जन्म, संक्रमण और अन्य नवजात जटिलताओं के उपचार में मददगार साबित हो रही है, साथ ही माताओं की प्रसवोत्तर देखभाल को भी मजबूत कर रही है। राज्यभर में इस योजना का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। बठिंडा के एक निजी अस्पताल में गंभीर पीलिया और सांस लेने में दिक्कत से जूझ रहे एक नवजात का करीब 1 लाख रुपये का इलाज भी पूरी तरह इस योजना के तहत कवर किया गया। पटियाला के गढ़ाया गांव के मनकीरत सिंह को जन्म के कुछ दिनों बाद पीलिया और सांस संबंधी समस्या हुई। उसके पिता बलविंदर सिंह ने बताया कि बच्चे के इलाज को लेकर आर्थिक चिंता थी, लेकिन योजना के तहत पूरा खर्च कवर हो गया। इसी तरह फरीदकोट के कोटकपूरा निवासी बिमला रानी के नवजात बच्चे को विशेष देखभाल की आवश्यकता थी, जिसका इलाज भी योजना के तहत सुरक्षित रूप से जारी है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि योजना के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। अधिकतर परिवार अब नवजात बच्चों को जन्म के पहले 72 घंटों में ही अस्पताल लेकर आ रहे हैं, जिससे समय पर इलाज मिल रहा है और जटिलताओं में कमी आ रही है। पंजाब सरकार लगातार लोगों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे निर्धारित केंद्रों और कैंपों के माध्यम से स्वास्थ्य कार्ड के लिए पंजीकरण कराएं, ताकि इस कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंच सके।
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