पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के डीए एरियर पर हाईकोर्ट सख्त, 17 नवंबर तक मांगा जवाब
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाए से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई की। अदालत के पूर्व आदेशों का पालन न होने के कारण पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को सूचित किया कि 1 जुलाई 2021 से 30 सितंबर 2026 तक डीए के बकाए की कुल देनदारी 22,818 करोड़ रुपये बनती है। अन्य लंबित देनदारियों को जोड़कर यह आंकड़ा 32,418 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को इस मामले में 17 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और सख्त टिप्पणियां की थीं। 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान का आदेश अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा 3 अगस्त को सुनाए गए फैसले पर फिलहाल कोई रोक (Stay) नहीं लगी है। इस फैसले के तहत पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के डीए का बकाया 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाना होगा। सरकार ने दिया 8 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी का हवाला पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि 18 सितंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में डीए में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 23 सितंबर को वित्त विभाग ने अधिसूचना जारी कर डीए को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। यह बढ़ोतरी 1 सितंबर 2026 से प्रभावी की गई है और सितंबर महीने के वेतन व पेंशन का भुगतान अक्टूबर में बढ़ी हुई दरों के अनुसार किया जा चुका है। मुख्य सचिव ने बड़े बकाए का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों के अनुसार राज्य में वेतन और पेंशन पर सालाना लगभग 58,064 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में डीए के एरियर के भुगतान के लिए बजट में उचित वित्तीय प्रबंध करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका और कानूनी पक्ष कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को चुनौती देते हुए 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा कुछ तकनीकी त्रुटियां बताए जाने के बाद 1 अक्टूबर को याचिका दोबारा दाखिल की गई है। सरकार का तर्क था कि वह कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर रही है और बकाए के भुगतान में हुई देरी जानबूझकर नहीं की गई है। इसलिए इसे अदालती आदेशों का उल्लंघन नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने स्वीकार किया कि हाईकोर्ट का फैसला वर्तमान में लागू है और उसी के अनुरूप भुगतान करना होगा।
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