नेपाल की प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल में भी ग्लेशियल झीलों को लेकर बढ़ी चिंता
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी ग्लेशियल झीलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ रही ग्लेशियल झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2019 में हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियल झीलों की संख्या करीब 562 थी। अब यह संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक बताई जा रही है। इनमें देश की 48 सबसे संवेदनशील और उच्च जोखिम वाली ग्लेशियल झीलें हिमाचल प्रदेश में स्थित होने की बात सामने आई है। सैटेलाइट अध्ययनों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न नदी जलग्रहण क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों की संख्या और उनका विस्तार लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सतलुज बेसिन में 750 से अधिक, चिनाब में 250 से अधिक, ब्यास में 90 से अधिक और रावी जलग्रहण क्षेत्र में 60 से अधिक ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मौजूदा स्थिति को जलवायु संकट का गंभीर और स्पष्ट संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे ग्लेशियल झीलों के फटने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है। प्रदेश सरकार संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी और बचाव उपायों को लेकर विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रही है। सरकार का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में सामने आ रही नई चुनौतियों से निपटने के लिए समय रहते योजनाबद्ध कदम उठाना बेहद जरूरी है। ग्लेशियल झीलों की बढ़ती संख्या और उनके विस्तार को देखते हुए संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की निगरानी तथा आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Posted By: Daily Suraj Bureau