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संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, बोले- आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं

27 Sep, 2026 03:21 PM

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिशें स्वीकार नहीं की जाएंगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें उच्चस्तरीय सत्र की सामान्य बहस को संबोधित करते हुए आतंकवाद, वैश्विक संघर्षों और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत का स्पष्ट रुख रखा।
 

अपने संबोधन में जयशंकर ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि एक “आतंकवाद का लगातार अभ्यास करने वाले” देश ने महासभा के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। उनका यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस संबोधन के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया था।
 

जयशंकर ने कहा कि कुछ तर्कों का इस्तेमाल आतंकवाद को सामान्य ठहराने और उसके परिणामों से बचने के लिए किया जा रहा है, लेकिन ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने बचाव के अधिकार का उपयोग करना जारी रखेगा।
 

विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद और सद्भावना एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की समझ या संबंध आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर आधारित होंगे, तो स्वाभाविक रूप से उन पर सवाल उठेंगे। उनके अनुसार, आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा।
 

विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जब आतंकवाद को राज्य स्तर पर समर्थन मिले और उसका उद्देश्य सीमा पार गतिविधियां हों, तब यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन जाता है।
 

उन्होंने ऐसे कार्यों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के प्रति शून्य-सहनशीलता की नीति में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जानी चाहिए और इसके वित्तीय नेटवर्क को उजागर कर प्रभावी ढंग से रोका जाना चाहिए।
 

अपने संबोधन में उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया एक ऐसे संघर्ष को देख रही है जो पहले से जटिल स्थिति को और अधिक गंभीर बना रहा है। उन्होंने यूक्रेन की स्थिति को भी चिंताजनक बताते हुए संघर्षों को समाप्त करने की दिशा में प्रयास तेज करने का आह्वान किया।
 

जयशंकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि अंतहीन युद्धों की जगह स्थायी समाधान और शांति-स्थापना के प्रयासों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व व्यापार की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने की अपील की।
 

समुद्री सुरक्षा पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र से लेकर लाल सागर और काला सागर तक कई स्थानों पर ऐसे हमले हुए हैं, जिनमें भारतीय नाविकों सहित विभिन्न देशों के लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
 

उन्होंने बताया कि भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर एक ऐसी पहल में भागीदारी की है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करना है।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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